Дар олои фикр кардани шарт роҳ аст

در آلا فکر کردن شرطِ راه است

Вале дар зоти ҳақи маҳз гуноҳ аст

ولی در ذاتِ حق محضِ گناه است

Буд дар зоти ҳақи андешаи ботил

بود در ذاتِ حق اندیشه باطل

Маҳоли маҳзи дони таҳсили ҳосил

محالِ محض دان تحصیلِ حاصل

Чу оётаст равшан гашта аз зот

چو آیات است روشن گشته از ذات

Нагардад зот ӯ равшани зи оёт

نگردد ذاتِ او روشن ز آیات

Ҳамаи олам ба нур ӯст пайдо

همه عالم به نورِ اوست پیدا

Куҷо ӯ гардад аз олами ҳувайдо ?

کجا او گردد از عالم هویدا؟

Нагунҷад нури зоти андари мазоҳир

نگنجد نورِ ذات اندر مظاهر

Ки сбҳот ҷалолаш ҳаст қоҳир

که سُبحاتِ جلالش هست قاهر

Раҳо кун ақлро , бо ҳақ ҳаме бош

رها کن عقل را، با حق همی باش

Ки тоб хур надорад чашми хафоаш

که تابِ خور ندارد چشمِ خفّاش

Дар он мавзе ки нури ҳақ далел аст

در آن موضع که نورِ حق دلیل است

Чаҳ ҷои гуфтугӯӣ Ҷабраил аст

چه جای گفتگوی جبرئیل است

Фиришта гарчи дорад қурби даргоҳ

فرشته گرچه دارد قرب درگاه

Нагунҷад дар мақом « лии маъаи аллоҳ »

نگنجد در مقام «لی مع‌الله»

Чу нур ӯ маликро пар бисӯзад

چو نور او مَلَک را پر بسوزد

Хирадро ҷумлаи по ва сар бисӯзад

خرد را جمله پا و سر بسوزد

Буд нури хирад дар зоти анвар

بود نورِ خرد در ذاتِ انور

Басони чашми сар дар чашмаи хур

بسانِ چشمِ سر در چشمهٔ خور

Чу мубсир дар назар наздик гардад

چو مُبْصَر در نظر نزدیک گردد

Басари зи идрок ӯ торик гардад

بصر ز ادراکِ او تاریک گردد

Сиёҳигар бадонеи нур зот аст

سیاهی گر بدانی نورِ ذات است

Ба торикии дарун , об ҳаёт аст

به تاریکی درون، آبِ حیات است

Сияҳи ҷузи қобзи нур басар нест

سیه جز قابضِ نورِ بصر نیست

Назар бигзор кин ҷой назар нест

نظر بگذار کاین جای نظر نیست

Чаҳ нисбати хокро бо олами пок

چه نسبت خاک را با عالمِ پاک

Ки идрокаст аҷз аз дараки идрок

که ادراک است عجز از درکِ ادراک

Сияҳи рўӣии зи мумкин дар ду олам

سیه روئی ز ممکن در دو عالم

Ҷудо ҳаргиз нашуд валлоҳи аълам

جدا هرگز نشد والله اعلم

Саводи алўҷаҳи фии алдорини дарвеш

سواد‌الوجه فی‌الدّارین درویش

Савод аъзам омад бе кам ва беш

سوادِ اعظم آمد بی کم و بیش

Чаҳ мегӯям ки ҳаст ин нуктаи борӣк

چه می‌گویم که هست این نکته باریک

Шаби равшани миёни рӯзи торик

شبِ روشن میانِ روزِ تاریک

Дар йени Машҳад ки анвор таҷаллӣ аст

در‌ین مشهد که انوارِ تجلّی است

Сухан дорам вале нои гуфтан аввалӣ аст

سخن دارم ولی نا‌گفتن اولی است

Хониш
бхш 7 - ҷвоб — рзо