Бо онкии дил ба дарди ту баси дардманд буд

با آنکه دل به درد تو بس دردمند بود

Ҷузи дарди чора дигараш нописанд буд

جز درد چارۀ دگرش ناپسند بود

Гар дасти мо зи домани васли ту кӯтаҳ аст

گر دست ما ز دامن وصل تو کوته است

Андари ҳавои қади ту ҳиммати баланд буд

اندر هوای قد تو همت بلند بود

Пеши қади ту сарви тамоюл зиёд кард

پیش قد تو سرو تمایل زیاد کرد

Бодаш фиканд боз ки баси худ писанд буд

بادش فکند باز که بس خود پسند بود

Он донаҳои холи сияҳ бар рахти магар

آن دانه های خال سیه بر رخت مگر

Аз баҳри чашми захм бар оташи сапанд буд

از بهر چشم زخم بر آتش سپند بود

Аз қайди зулфи дилкаши ту каси набарди ҷон

از قید زلف دلکش تو کس نبرد جان

Зеро ки мӯ ба мӯи ҳамаи қайду каманд буд

زیرا که مو به مو همه قید و کمند بود

Аз бас ки шоҳидии з май ишқ буд маст

از بس که شاهدی ز می عشق بود مست

Умр азиз рафт надонист ки чанд буд

عمر عزیز رفت ندانست که چند بود