Ба ишқи чашми беморати дилами бемор май байнам
به عشق چشم بیمارت دلم بیمار میبینم
Вале аз нӯши сероби лабати тимор май байнам
ولی از نوش سیراب لبت تیمار میبینم
Ҳамеша чашми сармасти туро махмур ме ёбам
همیشه چشم سرمست تو را مخمور مییابم
Вале дар айни сармастии хушу ҳушёр май байнам
ولی در عین سرمستی خوش و هشیار میبینم
Лаби лаълат чу май бӯсами ҳадисӣ бозме гӯям
لب لعلت چو میبوسم حدیثی بازمیگویم
Аз он тӯтии нутқи худ шкргФтор май байнам
از آن طوطی نطق خود شکرگفتار میبینم
Ниҳоли сарви болои туро бар дида бинишонам
نهال سرو بالای تو را بر دیده بنشانم
Чаҳ нахласт инки чашми хеши бархӯрдор май байнам
چه نخلست اینکه چشم خویش برخوردار میبینم
Ба олами ҳркҷои ҳасани рухи хӯбӣ ки ме бошад
به عالم هرکجا حسن رخ خوبی که میباشد
Хаёли акси хуршеди ҷамоли ёр май байнам
خیال عکس خورشید جمال یار میبینم
Бибин бе рӯй ҷонона чаҳ бошад ҳоли ҷону дил
ببین بیروی جانانه چه باشد حال جان و دل
Чу бе гули хотири булбули чунин афкор май байнам
چو بیگل خاطر بلبل چنین افکار میبینم
Чу Сайиди сӯфии софӣ ки бошад сокини хилват
چو سید صوفی صافی که باشد ساکن خلوت
зи ишқат бар сари бозори шастаи зор май байнам
ز عشقت بر سر بازار شسته زار میبینم