Рӯй худро ба нур дил бинмуд
روی خود را به نور دل بنمود
Назарии хуш ба чашм мо фармуд
نظری خوش به چشم ما فرمود
Соқии мо чу ринд мастӣ дид
ساقی ما چو رند مستی دید
Май хмхонаҳро ба мо паймӯд
می خمخانه را به ما پیمود
Дили моро ба лутфи худ бнўохт
دل ما را به لطف خود بنواخت
Раҳматии ҳам ба ҷой худ фармуд
رحمتی هم به جای خود فرمود
Оташӣ рӯ намӯд Мӯсо ро
آتشی رو نمود موسی را
Дар ҳақиқати илоҳи Мӯсо буд
در حقیقت اله موسی بود
Дар майхонаи ҳамаи олам
در میخانهٔ همه عالم
Соқии мо ба рӯй мо багушӯд
ساقی ما به روی ما بگشود
Дарди дардаши дилӣ ки нӯш накард
دُرد دردش دلی که نوش نکرد
Дард ӯро куҷо буд беҳбуд
درد او را کجا بود بهبود
Ҷони орифи фидои Сайиди бод
جان عارف فدای سید باد
Ки дили орифон аз ӯ осуд
که دل عارفان از او آسود