Ҳоли дилро танам аз заъф забонам гуёст
حال دل را تنم از ضعف زبانم گویاست
Рози оташи зи ҷигари тишнагӣ хас пайдост
راز آتش ز جگر تشنگی خس پیداست
Туу мастонаи либосӣ ки тарозии тани хеш
تو و مستانه لباسی که طرازی تن خویش
наметавон кард тафохур ки фалон бесарв пост
می توان کرد تفاخر که فلان بی سرو پاست
Шудам аз заъфи ғуборӣ ки ниёем ба назар
شدم از ضعف غباری که نیایم به نظر
Сӯрат ҳастем аз оина дил пайдост
صورت هستیم از آینه دل پیداست
Зарра ҳар чанд шавад гирди фано хуршед аст
ذره هر چند شود گرد فنا خورشید است
Қатра ҳар чанд шавад хок на охир дарёст ?
قطره هر چند شود خاک نه آخر دریاست؟