Шавқи рӯзӣ ки паии чоки гиребон май гашт

شوق روزی که پی چاک گریبان می‌گشت

Умрҳо буд ки маҷнӯни ту урён май гашт

عمرها بود که مجنون تو عریان می‌گشت

Ёди меъмории маҷнӯн ки зи хокистари дил

یاد معماری مجنون که ز خاکستر دل

Ранг ҳар хона ки май рехти биёбон май гашт

رنگ هر خانه که می‌ریخت بیابان می‌گشت

Гардиши чашми ту рӯзӣ ки шикорам ме кард

گردش چشم تو روزی که شکارم می‌کرد

То чаҳҳо дар дилат эй зуди пушаймон май гашт

تا چه‌ها در دلت ای زود پشیمان می‌گشت

Ноларо бо нафаси сӯхтаи бнўохтаҳ буд

ناله را با نفس سوخته بنواخته بود

Ки Нитсаатон чиқадр бесару сомон май гашт

که نیستان چقدر بی‌سر و سامان می‌گشت