Ҷое ки гул аз нола кунад болу пари хеш

جایی که گل از ناله کند بال و پر خویش

Чун зарра фитодем ба доми назари хеш

چون ذره فتادیم به دام نظر خویش

То каъба ба як гардиши чашм ту давидем

تا کعبه به یک گردش چشم تو دویدیم

Шарманда нагаштем зи азми сафари хеш

شرمنده نگشتیم ز عزم سفر خویش

Бе шӯри ҷунуни фол биёбон натавон зад

بی شور جنون فال بیابان نتوان زد

Хзристи муҳаббат ки буд роҳбари хеш

خضریست محبت که بود راهبر خویش

Чун пораи дили доман ҳар хори гирифтем

چون پاره دل دامن هر خار گرفتیم

Миннат накашидем зи мижгонтар хеш

منت نکشیدیم ز مژگان تر خویش

Кайфияти Мансур аз ин бода хуморӣ аст

کیفیت منصور از این باده خماری است

Май зебад агар маст ту нозад ба сари хеш

می زیبد اگر مست تو نازد به سر خویش