Ҳошо ки кашами баҳри тараби соғари ҷам ро
حاشا که کَشَم بَهْرِ طَرَب، ساغَرِ جَم را
Аз ғам чаҳ шикояти ман ху карда бағам ро
از غَم چه شکایت، منِ خوکرده به غَم را؟
Ҳайҳот каз айёми ҳётши бишуморам
هیهات کز اَیّامِ حَیاتش بِشُمارم
Рӯзӣ ки наёбам бадали осеби ?илам ро
روزی که نیابم به دل، آسیبِ اَلَم را
Зинҳор ки май нӯшаму беҳудаи бихандам
زنهار که می نوشم و بیهوده بخندم
То ёфтаам чошнии заҳри ситам ро
تا یافتهام چاشنیِ زهرِ ستم را
эй ъшртёни ӣнҳамаи инкори з ғам чист
ای عشرتیان! اینهمه انکار ز غم چیست؟
Рафтам бичашонам бшмои лиззати ғам ро
رفتم بچشانم به شما، لِذَّتِ غم را
Завқи ?илам аз синаи хунин ҷгарон пресс
ذوقِ اَلَم از سینهیِ خونینجگران پُرْس
КоФсрдаҳи дилон қадар бидонанд ?илам ро
کافسردهدلان، قَدْر بدانند اَلَم را
Он қадар шиносам ки чу шабҳо ситаму ғам
آن قدر شناسم که چو شبها، سِتَم و غَم
Созанди басари манзили ман ранҷаи қадам ро
سازند به سرمنزلِ من، رنجه، قدم را
Аз завқи занами бӯса ва бар дидаи гузорам
از ذوق زَنَم بوسه و بر دیده گُذارم
Шукронаи он пои ғаму дасти ситам ро
شکرانهیِ آن پایِ غَم و دستِ سِتَم را
Аз бскаҳ чу деринаи рафиқони мувофиқ
از بس که چو دیرینه رفیقانِ موافق
Донем ғанимати ману ғами суҳбати ҳам ро
دانیم غنیمت، من و غَم، صحبتِ هم را
Зон бим ки уфтад Бамёни тарҳи ҷдоӣӣ
زان بیم که افتد به میان، طرحِ جدایی
Ғами доман ман гирад ва ман домани ғам ро
غَم، دامنِ من گیرد و من، دامنِ غَم را
Ғам нест агар бршкнди маҳфили ъушрат
غم نیست اگر بَرشِکَند مَحْفِلِ عِشْرَت
Ёрб ки шикастӣ нарасад маҷлиси ғам ро
یارب که شکستی نرسد مَجْلِسِ غَم را
Ёрони ғами ошом чу бо ҳам биншинанд
یارانِ غَمآشام چو با هم بنشینند
То бози намоянди баҳами тоқати ҳам ро
تا باز نمایند به هم طاقتِ هم را
Уфтад чу бмн давр бигӯянд ки даврон
افتد چو به من، دور بگویند که دوران
Аз ҳавсила афзӯн диҳадам соғари ҷам ро
از حوصله، افزون دَهَدَم ساغَرِ جَم را
Даии баради фиреби ҳавасами ҷониби гулшан
دی برد فریبِ هَوَسَم، جانِبِ گُلْشَن
Гуфтам бсбо каз чаҳ кунам чораи ғам ро
گفتم به صبا کز چه کنم چارهیِ غَم را؟
Ҳошо ки дигар лаби бшкри хандаи гушойам
حاشا که دگر، لب به شکرخنده گُشَایم
Он ба ки кунам сарфи ғамии ин ду се дам ро
آن به که کنم صَرْفِ غَمی، این دو سه دَم را
Аз бода агар тоӣбм аз зуҳд ва вараъ нест
از باده اگر تائِبم، از زُهْد و وَرَع نیست
эй онкии бмн арза кунӣ соғари ҷам ро
ای آنکه به من، عَرْضِه کُنی ساغَرِ جَم را
Соқӣ агарам дӯст буд бӯсаму нӯшам
ساقی اگرم دوست بُوَد بوسم و نوشم
Резади ҳамагар дар қадаҳами шарбати сам ро
ریزَد همه گر در قَدَحَم، شربتِ سَم را
Дӯшина ки пинҳони зи хирад буд хаёлам
دوشینه که پنهان ز خرد بود خیالم
То ёд кунам чораи ҷигари ковии ғам ро
تا یاد کنم چاره، جگرکاویِ غم را
Рафтам ба харобот ва чу пер хирадам дид
رفتم به خَرابات و چو پیرِ خِرَدَم دید
Дар пои хами афтодау дрбохтаҳи дам ро
در پایِ خُم افتاده و درباخته دَم را
Гуфто ки зтаҳи ҷуръаи ҷам дил накушояд
گفتا که ز تهجُرعهیِ جَم، دل نَگُشاید
Бигзор зи кафи соғар ва бурдор қалам ро
بُگذار ز کَف، ساغَر و بَردار قَلَم را
Авроқи маъонӣати фаромӯш ва ту хомӯш
اوراقِ معانیت، فراموش و تو خاموش
Мапаснд азин беш нигаҳбонии дам ро
مپسند از این بیش، نگهبانیِ دَم را
Тории ду се аз зулфи арӯсони сухани каш
تاری دو سه از زلفِ عروسانِ سخن کَش
Шероза кун ин дафтари пошидаи зи ҳам ро
شیرازه کن این دفترِ پاشیده ز هم را
Ин нағма чу шуд гӯшзади шоҳиди табъам
این نغمه چو شد گوشزدِ شاهِدِ طَبْعَم
Бгзошти дарин арсаи далеронаи қадам ро
بگذاشت در این عرصه، دلیرانه، قدم را
Гуфтам буд он ба ки бороиши унвон
گفتم، بُوَد آن بِه که به آرایشِ عنوان
Мадҳӣ кунаму тӯҳфа барам фахрамам ро
مَدْحی کُنَم و تُحْفِه بَرَم فَخْرِ اُمَم را
Осӯдаи Ясриби шаҳи лўлоки Муҳамад ( с )
آسوده یثرب شهِ لولاک، محمد (ص)
Каз қурби ҳаримаши шарафи афзӯдаи ҳарам ро
کز قُرْبِ حَریمش، شَرَف افزوده حَرَم را