Аё сутӯдаи хисолӣ ки чархи гоҳи ато

ایا ستوده خصالی که چرخ گاه عطا

Ҳазор чашм ба даст ту дӯхт аз ахтар

هزار چشم به دست تو دوخت از اختر

Равост каз паии базми ту бе талаби резӣ

رواست کز پی بزم تو بی طلب ریزی

ЗноФаҳи мшги вази неи шукр аз садафи гавҳар

زنافه مشگ وز نی شکر از صدف گوهر

Шавад чу оризати афрӯхтаи зи оташи хашм

شود چو عارضت افروخته ز آتش خشم

Зтоби чеҳраи ту об мешавад озар

زتاب چهره تو آب می شود آذر

Барояд аз дили хуршеди ховарии такбир

برآید از دل خورشید خاوری تکبیر

Шӯии савор чу бар Рахши осмони пайкар

شوی سوار چو بر رخش آسمان پیکر

Ҳамеша то ки гуҳари рости риштаи шероза

همیشه تا که گهر راست رشته شیرازه

Мудом то згҳр ҳаст зинати афсар

مدام تا زگهر هست زینت افسر

Буд чу риштаи адуии ту дар назар бе қадар

بود چو رشته عدوی تو در نظر بی قدر

Муҳиби ҷоҳ ту бошад азиз чун гавҳар

محب جاه تو باشد عزیز چون گوهر

Сипеҳри мнзлтои соҳбо буд ҳар чанд

سپهر منزلتا صاحبا بود هر چند

Дилами фигори збидоди чархи дун парвар

دلم فگار زبیداد چرخ دون پرور

Чаро шикояти худ пеши рӯзгор барам

چرا شکایت خود پیش روزگار برم

Ки ошно набӯд раҳм бо дили кофар

که آشنا نبود رحم با دل کافر

Чу дар паноҳ ту бошам зи ҳодисот чаҳ ғам

چو در پناه تو باشم ز حادثات چه غم

Чу шамъ парда нишин шуд чаҳ бокаш аз сарсар

چو شمع پرده نشین شد چه باکش از صرصر

Замони пеш ки дасти талаб бўом гирифт

زمان پیش که دست طلب بوام گرفت

Ба ранги ғунчаи збоғи сахоати муштии зар

به رنگ غنچه زباغ سخات مشتی زر

Агар талаби ннмоӣии змн чаҳ беҳтар аз он

اگر طلب ننمائی زمن چه بهتر از آن

Вагарна сабр кунӣ то мавоҷиби дигар

وگرنه صبر کنی تا مواجب دیگر