зи худ чандон фаромӯшам ки ноими ҳеҷ дар ёдаш

ز خود چندان فراموشم که نآیم هیچ در یادش

Агарчӣ ҳамчуи булбули рӯз ва шаб бошам ба фарёдаш

اگرچه همچو بلبل روز و شب باشم به فریادش

Дарин гулшан надонам оташи шавқ кӣ боло шуд

درین گلشن ندانم آتش شوق کی بالا شد

Ки қамарӣ шуд чу хокистар ба ёди сарви озодаш !

که قمری شد چو خاکستر به یاد سرو آزادش!

Буд таъзими икрнгӣ ба ҳам улфат прессатон ро

بود تعظیم یکرنگی به هم الفت پرستان را

Сар машшота мебошад ба пои нахли шамшодаш

سر مشاطه می‌باشد به پای نخل شمشادش

Ба ёди сӯрат чашмаш шудам чун серума аз ҳайрат

به یاد صورت چشمش شدم چون سرمه از حیرت

Магар шуд мӯии чинии хомаи ангушти беҳзодаш ? !

مگر شد موی چینی خامه انگشت بهزادش؟!

зи ҷӯши ҷилваи нахли қоматаш аз бод май рақсад

ز جوش جلوه نخل قامتش از باد می‌رقصد

Ба саҳни боғ чун сарвӣ ки ҳар сӯи афканди бодаш

به صحن باغ چون سروی که هر سو افکند بادش

Сифед аз интизор кӯҳкан шуд чашми навмидӣ

سفید از انتظار کوهکن شد چشم نومیدی

Ки ҷӯии шер кӣ гардад зи ширини коми Фарҳодаш

که جوی شیر کی گردد ز شیرین کام فرهادش

Навой нолаи булбул агар бар осмон сояд

نوای ناله بلبل اگر بر آسمان ساید

Ба гӯши ранги гул ҳаргиз наёяд сози фарёдаш

به گوش رنگ گل هرگز نیاید ساز فریادش

Нигоҳ аз дидани рӯяти зи ҳайрат машрабӣ дорад

نگاه از دیدن رویت ز حیرت مشربی دارد

Нигар аз ҷавҳар ойӣна шуд сармашқи устодаш

نگر از جوهر آیینه شد سرمشق استادش

Ба қуллоби ҳавас то чанд оҳӯии сухангирӣ ? !

به قلاب هوس تا چند آهوی سخن گیری؟!

Ғизол мо кунад доми умед аз чашми сайёдаш !

غزال ما کند دام امید از چشم صیادش!

Раҳоӣ нест аз доми аҷал аз бас наме бошад

رهایی نیست از دام اجل از بس نمی‌باشد

Шикасти байзаи фӯлоди андари банди озодаш

شکست بیضه فولاد اندر بند آزادش

Хушо туғрули зи мазмуни ҷаноби ҳазрати бедил

خوشا طغرل ز مضمون جناب حضرت بیدل

Ки улфати олимиро доғ кард оташ ба бунёдаш !

که الفت عالمی را داغ کرد آتش به بنیادش!