Ало эй онкӣ шуд иқболи ёвар

الا ای آنکه شد اقبال یاور

Ба суккон дарат алтофи бовар !

به سکان درت الطاف باور!

Туе пушту паноҳи халқи олам

تویی پشت و پناه خلق عالم

Ба длришони туе пайвастаи марҳам

به دلریشان تویی پیوسته مرهم

Ба расм тӯҳфа кардам нусхае чанд

به رسم تحفه کردم نسخه‌ای چند

Ба науммат аз камоли лутфи бенанд

به نامت از کمال لطف بینند

Ба ҳар солии зи ҷумъа то душанбе

به هر سالی ز جمعه تا دوشنبه

Қиёсӣ кун аз он солаши бадв ба

قیاسی کن از آن سالش بدو به

Агар шанбе ояд рӯзи наврӯз

اگر شنبه آید روز نوروز

Буд он соли пурбарф эй дили афрӯз !

بود آن سال پُربرف ای دل‌افروز!

Буд он соли хушку нархи арзон

بود آن سال خشک و نرخ ارزان

Агарчӣ камтари оради абри борон

اگرچه کمتر آرد ابر باران

Буд нуқсони дахлу миваи камтар

بود نقصان دخل و میوه کمتر

Шавад дар соли дигари ғалларо бар

شود در سال دیگر غله را بر

Валикини кӯдаконро марг бошад

ولیکن کودکان را مرگ باشد

Азони нахли падар бебарг бошад

ازآن نخل پدر بی‌برگ باشد

Агар наврӯз дар якшанбе ояд

اگر نوروز در یکشنبه آید

Ба назми ин сухан фикрӣ бияёд

به نظم این سخن فکری بیاید

Зимистони тангу сармо саҳл бошад

زمستان تنگ و سرما سهل باشد

Ба сарҳо кӣ ситез ҷаҳл бошад ? !

به سرها کی ستیز جهل باشد؟!

Шавад борон бисёре баҳорон

شود باران بسیاری بهاران

Шавад тағйири пунбаи силаи арзон

شود تغییر پنبه سله ارزان

Валикини мивааш бисёр гардад

ولیکن میوه‌اش بسیار گردد

Баҳори хуб ва пуранбор гардад

بهار خوب و پرانبار گردد

Агар душанбе ояд рӯзи наврӯз

اگر دوشنبه آید روز نوروز

Ба некиҳои ғаллаи чашмро дуз

به نیکی‌های غله چشم را دوز

Зимистони хушку сармо сахт ояд

زمستان خشک و سرما سخت آید

Зимистони пӯстин пари рахт бояд

زمستان پوستین پر رخت باید

Шавад он соли дахли ғаллаи некӯ

شود آن سال دخل غله نیکو

Вале султон ба лашкар оварад рӯ

ولی سلطان به لشکر آورد رو

Шавад он соли нархи ғаллаи арзон

شود آن سال نرخ غله ارزان

Агарчӣ мешавад дар ғаллаи нуқсон

اگرچه می‌شود در غله نقصان

намедонад касе онро ба ҳар ҳол

نمی‌داند کسی آن را به هر حال

Шавад ғаллаи гарон дар охири сол

شود غله گران در آخر سال

Агар наврӯз дар се шанбе ояд

اگر نوروز در سه‌شنبه آید

Яқини он соли сар то сар ба ояд

یقین آن سال سر تا سر به آید

Шавад он соли пари борону пурбарф

شود آن سال پر باران و پُربرف

Ба арзонӣ ғалла меравад ҳарф

به ارزانی غله می‌رود حرف

Хилоиқи ҷумлагӣ осӯда бошанд

خلایق جملگی آسوده باشند

Ҳамаи кас дар фароғат бӯда бошанд

همه‌کس در فراغت بوده باشند

Шавад миваи қалилу ғалла бисёр

شود میوه قلیل و غله بسیار

Буд беморӣу марги андак эй ёр

بود بیماری و مرگ اندک ای یار

Агар шуд чоршанбеи рӯзи наврӯз

اگر شد چارشنبه روز نوروز

Мапурс аҳволи сол эй марди дилсӯз

مپرس احوال سال ای مرد دلسوز

Дар он сол эй бародари ғаллаи корӣ

در آن سال ای برادر غله‌کاری

Шавад некӯи зи борони баҳорӣ

شود نیکو ز باران بهاری

Шавад ғаллаи талаф чун ки дар он сол

شود غله تلف چون که در آن سال

Миёна бошад исми он солро ҳол

میانه باشد اسم آن سال را حال

Набошад нархро охири қарорӣ

نباشد نرخ را آخر قراری

Ба мардум марг бошад бе шуморӣ

به مردم مرگ باشد بی‌شماری

Агарчӣ мардумон гирданд бе ҷон

اگرچه مردمان گردند بی‌جان

Валикини бештари марги бузургон

ولیکن بیشتر مرگ بزرگان

Агар наврӯз дар панҷшанбе ояд

اگر نوروز در پنجشنبه آید

Нкўсоласт ин гуфтан нишоед

نکوسال است این گفتن نشاید

Зимистон сахт ояд мива бисёр

زمستان سخت آید میوه بسیار

Валикини кори ғаллаи саҳл эй ёр

ولیکن کار غله سهل ای یار

Дар он соли ин бути фархундаи дидор

در آن سال این بت فرخنده‌دیدار

Шавад нархаши гарону марг бисёр

شود نرخش گران و مرگ بسیار

Агар дар ҷумъа ояд рӯзи наврӯз

اگر در جمعه آید روز نوروز

зи ҳайронии шинави ин назм омӯз !

ز حیرانی شنو این نظم آموز!

зи ғаллаи баҳра Эй гиранд мардум

ز غله بهره‌ای گیرند مردم

з ҳар ҷинс аз ҳамаи беҳтари зи гандум

ز هر جنس از همه بهتر ز گندم

Шавад дар мардумон кам мива хӯрдан

شود در مردمان کم میوه خوردن

Шавад бо кӯдакони баси маргу мурдан

شود با کودکان بس مرگ و مردن

Ду се байт аз нақибӣ ёдгор аст

دو سه بیت از نقیبی یادگار است

Чаро кини аҳли ҳикматро ба кор аст

چرا کین اهل حکمت را به کار است

РФиқо аз карами ҳргаҳ ки хуоне

رفیقا از کرم هرگه که خوانی

Ба сомонии дуое май расонӣ !

به سامانی دعایی می‌رسانی!