Биёи соқӣ эй муқтадои тараб !
بیا ساقی ای مقتدای طرب!
Биё эй ту домоди бинти алънб !
بیا ای تو داماد بنتالعنب!
Дил мурдаамро ба мезинда кун
دل مردهام را به می زنده کن
Ки аз шӯр мастӣ бигӯям сухан !
که از شور مستی بگویم سخن!
Биёи соқӣ эй обу ранги баҳор
بیا ساقی ای آب و رنگ بهار
Биё эй Флотўни ҳикмати шиор !
بیا ای فلاطون حکمتشعار!
Ба маъҷун руз кун диламро қавӣ
به معجون رز کن دلم را قوی
Ки номаш буд шарбати исавӣ
که نامش بود شربت عیسوی
Биёи соқӣ эй офтоби гарм
بیا ساقی ای آفتاب گرم
Ки бебода умрӣаст дардисарам !
که بیباده عمریست دردسرم!
На сандал ба дафъ хумораш давост
نه صندل به دفع خمارش دواست
Марои ҷуръае май ба аз кимиёст !
مرا جرعهای می به از کیمیاست!
Биёи соқии ҳангоми нӯш май аст
بیا ساقی هنگام نوش می است
Баҳори тарабро хазон дар пайаст !
بهار طرب را خزان در پی است!
Тағофул макун бас ки даврони дун
تغافل مکن بس که دوران دون
Ба як дам кунад айши моро забун !
به یک دم کند عیش ما را زبون!
Биёи соқии боби Муғон боз кун
بیا ساقی باب مغان باز کن
Ба риндони махмур овоз кун
به رندان مخمور آواز کن
Ки майхонаи бкшоди пери сҳо
که میخانه بکشاد پیر سها
Расад ҳаркии нӯшади зи шоҳу гадо !
رسد هرکه نوشد ز شاه و گدا!
Биёи соқии маъҷуни оташи мизоҷ
بیا ساقی معجون آتشمزاج
Ки ҷуз ӯ ба дардам набошад алоҷ
که جز او به دردم نباشد علاج
Худоро дили риш ман кун даво
خدا را دل ریش من کن دوا
Ки афтодагонро туе раҳнамо !
که افتادگان را تویی رهنما!
Биёи соқӣ олам надорад мадор
بیا ساقی عالم ندارد مدار
Ҳамон бодаи соф аз хам барор
همان باده صاف از خم برآر
Ки бо ҳам банушем ва айшӣ кунем
که با هم بنوشیم و عیشی کنیم
Замонии зи андӯҳ ва кулуфт раҳем
زمانی ز اندوه و کلفت رهیم
Биёи соқии муштоқ рӯй туам
بیا ساقی مشتاق روی توام
Асири хами ҷаъди мӯии туам !
اسیر خم جعد موی توام!
Муҳайёст асбоби базму тараб
مهیاست اسباب بزم و طرب
Ба ҷузи ршҳаҳи шавқи моءи ънб
به جز رشحه شوق ماء عنب
Биёи соқӣ эй садр маҷлис нишин
بیا ساقی ای صدر مجلس نشین
Туро малики хӯбӣ ба зери нигин !
تو را ملک خوبی به زیر نگین!
Туе бонии тоқи қасри Муғон
تویی بانی طاق قصر مغان
Туе ҳукмрони хроботён !
تویی حکمران خراباتیان!
Биёи соқӣ эй оризати бӯстон
بیا ساقی ای عارضت بوستان
Лабати барги гули чеҳраи ?ути арғавон
لبت برگ گل چهرهات ارغوان
зи зулфати бёшФтаҳи сунбул ба боғ
ز زلفت بیاشفته سنبل به باغ
зи рухсори моҳат шудаи лолаи доғ !
ز رخسار ماهت شده لاله داغ!
Биёи соқиои ҷони фидои туам
بیا ساقیا جانفدای توام
Ту шоҳӣ ба муғи ман гадои туам !
تو شاهی به مغ من گدای توام!
Расидам ба дарбори майхонаи ?ут
رسیدم به دربار میخانهات
Бидиҳ ҷуръае май зи паймонаи ?ут
بده جرعهای می ز پیمانهات
Биёи соқиои оФтобои мҳо
بیا ساقیا آفتابا مها
Фалаки рутбаи мсндншинои шҳо
فلکرتبه مسندنشینا شها
Ки аҳди бъидист бебода ам
که عهد بعیدیست بیبادهام
зи шодии басии давр афтодаам !
ز شادی بسی دور افتادهام!
Биёи соқӣ эй обрӯии Муғон
بیا ساقی ای آبروی مغان
Биё эй ту матлӯби перу ҷавон !
بیا ای تو مطلوب پیر و جوان!
Маро кард андешаи даҳри пер
مرا کرد اندیشه دهر پیر
Ҷавони соз бо бодаам дасти гир !
جوان ساز با بادهام دست گیر!
Биёи соқио навбаҳорам расед
بیا ساقیا نوبهارم رسید
Ба тарафи чамани сарв сар баркашид !
به طرف چمن سرو سر برکشید!
Чу бо сояи сарв дар пои ҷӯ
چو با سایه سرو در پای جو
Ба ман даҳ зи сари ҷӯш май як сабу !
به من ده ز سر جوش می یک سبو!
Биёи соқии миноӣ меро барор
بیا ساقی مینای می را برآر
Ки бардаи шуъӯри ҳарифони хумор !
که برده شعور حریفان خمار!
Ба ҷомӣ ки ҷамшеди ҳасрати барад
به جامی که جمشید حسرت برد
Бидиҳ то гиребони ғамро дард !
بده تا گریبان غم را درد!
Биёи соқии гул ханда зад дар чаман
بیا ساقی گل خنده زد در چمن
Парешони зи бод сабо шуд саман !
پریشان ز باد صبا شد سمن!
Май софро соғар аз лола кун
می صاف را ساغر از لاله کن
зи дили дафъи ғамҳои садсола кун !
ز دل دفع غمهای صدساله کن!
Биёи соқиои кӯҳу саҳроу дашт
بیا ساقیا کوه و صحرا و دشت
Саропо чу хати лаби ёри гашт !
سراپا چو خط لب یار گشت!
Ҷаҳони равнақ аз Хизр раҳбар гирифт
جهان رونق از خضر رهبر گرفت
Дилами майли мино ва соғар гирифт
دلم میل مینا و ساغر گرفت
Биёи соқиои сози айши ифтитоҳ
بیا ساقیا ساز عیش افتتاح
Намои бикри рузро ба шодии никоҳ !
نما بکر رز را به شادی نکاح!
Хатиб суроҳе бикун хутбаи сар
خطیب صراحی بکن خطبه سر
Ба оҳанги қул қул ба садри шӯру шар !
به آهنگ قلقل به صدر شور و شر!
Биёи соқӣ эй мояи хуррамӣ
بیا ساقی ای مایه خرمی
Биё эй гули гулшан беғамӣ !
بیا ای گل گلشن بیغمی!
Ҳам оҳанги фарёд чун булбулам
همآهنگ فریاد چون بلبلم
зи миноти муштоқи як қул қалам
ز مینات مشتاق یک قلقلم
Биёи соқии маҷбур даврон шудам
بیا ساقی مجبور دوران شدم
Фалак бар сар оварад рӯз бидам
فلک بر سر آورد روز بدم
Ба як соғар май марои гири даст
به یک ساغر می مرا گیر دست
Ки ман аз азали омадам май параст
که من از ازل آمدم میْپرست
Биёи соқӣ эй дастгири ҳама
بیا ساقی ای دستگیر همه
Туе дар хароботи пери ҳама
تویی در خرابات پیر همه
Туро сбҳаҳ аз дони ангури шавқ
تو را سبحه از دان انگور شوق
Туро саҷда бар тоқи абрӯии завқ
تو را سجده بر طاق ابروی ذوق
Биёи соқии субҳи биногваши ту
بیا ساقی صبح بناگوش تو
Биёи соқии лабҳои май нӯши ту
بیا ساقی لبهای میْنوش تو
Яке аз сипеҳри тараб дам занад
یکی از سپهر طرب دم زند
Яке ханда бар ҳол мотам занад !
یکی خنده بر حال ماتم زند!
Биёи соқӣ май даҳ ки мастам кунад
بیا ساقی می ده که مستم کند
зи мастии марои бут пурситам кунад !
ز مستی مرا بتپرستم کند!
Суҷуд оварам тоқи абрӯат ро
سجود آورم طاق ابروت را
Батонро пурситам на тоғӯтро !
بتان را پرستم نه طاغوت را!
Биёи соқии эҷоди майхонаи соз
بیا ساقی ایجاد میخانه ساز
зи лои таҳи бодаи паймонаи соз
ز لای ته باده پیمانه ساز
Ки паймона аз лой мегар кунӣ
که پیمانه از لای می گر کنی
Куҷои фикри Искандар ва кӣ кунӣ ? !
کجا فکر اسکندر و کی کنی؟!
Биёи соқии афтодам аз ёри давр
بیا ساقی افتادم از یار دور
Ба ҷомӣ ки бахшад диламро сарвар
به جامی که بخشد دلم را سرور
Карам кун маро зонкаҳ ҳастам ғариб
کرم کن مرا زآنکه هستم غریب
зи ҳиҷрони дилдору баъди ҳабиб
ز هجران دلدار و بعد حبیب
Биёи соқӣ эй ман ғулом дарат
بیا ساقی ای من غلام درت
Ту шоҳӣ ва ман камтарини чокарат !
تو شاهی و من کمترین چاکرت!
Ба махмурӣам ҷоми шоҳонаи даҳ
به مخموریام جام شاهانه ده
Марогар диҳӣ май ба паймонаи даҳ !
مرا گر دهی می به پیمانه ده!
Биёи соқии мардуми ман аз даврии ?ут
بیا ساقی مردم من از دوریات
Чу ойӣнаи маҳвами зи маҳҷӯрии ?ут
چو آیینه محوم ز مهجوریات
Биёи акси рухсораи худ намо
بیا عکس رخساره خود نما
Ки то дидаамро фазояд ҷило !
که تا دیدهام را فزاید جلا!
Биёи соқӣ аз бода кун розӣ ам
بیا ساقی از باده کن راضیام
Баради фикри мстқбл ва мозӣам !
برد فکر مستقبل و ماضیام!
зи махмурӣ май марои ҳоли байн
ز مخموری می مرا حال بین
Танам гашта аз заъф чун на?ил байн !
تنم گشته از ضعف چون نال بین!
Биёи соқии сӯсани забони сано
بیا ساقی سوسن زبان ثنا
Баровардааст токи дасти дуо
برآورده است تاک دست دعا
Яке мефиристад санои ту ро
یکی میفرستد ثنای تو را
Ба омни кшодаҳи яке панҷа ро
به آمن کشاده یکی پنجه را
Биёи соқӣ бо дидаи ашкбор
بیا ساقی با دیده اشکبار
Ба роҳат шудаи чашми наргиси ду чор
به راهت شده چشم نرگس دو چار
Ки то сарви қадат тамошо кунад
که تا سرو قدت تماشا کند
Чу бо қамарии ин роз ифшо кунад
چو با قمری این راز افشا کند
Биёи соқӣ эй нахли шодии самар
بیا ساقی ای نخل شادیثمر
Биё эй снўбрқди мўкмр !
بیا ای صنوبرقد موکمر!
Аз он май ки токаши санавбар буд
از آن می که تاکش صنوبر بود
зи кайфияташи шӯри маҳшар буд !
ز کیفیتش شور محشر بود!
Биёи соқиои фасл наврӯз шуд
بیا ساقیا فصل نوروز شد
Гули боғ аз ту дил афрӯз шуд !
گل باغ از تو دلافروز شد!
Қадаҳи гир бо дасти Байзои худ
قدح گیر با دست بیضای خود
Тнки зарф михўораҳ кун озмуд
تنکظرف میخواره کن آزمود
Биёи соқии умри ту ҷовиди бод
بیا ساقی عمر تو جاوید باد
Марои рӯзи васл ту омад ба ёд !
مرا روز وصل تو آمد به یاد!
Руфӯи чок рӯй фироқами намо
رفو چاک روی فراقم نما
зи мавҷ мевасл кун риштаро !
ز موج می وصل کن رشته را!
Биёи соқӣ эй ахтар шаб фурӯз
بیا ساقی ای اختر شبفروز
Биё эй рахти шамъи парвонаи сӯз !
بیا ای رخت شمع پروانهسوز!
Ба гирди сарати ҳамчу парвона ам
به گرد سرت همچو پروانهام
Бидиҳ май ки муштоқ паймонаам !
بده می که مشتاق پیمانهام!
Биёи соқӣ эй чеҳраи ?ути субҳи дайр
بیا ساقی ای چهرهات صبح دیر
Биёи оқибат аз ту гардад ба хайр
بیا عاقبت از تو گردد به خیر
Бикун маст аз зӯр май ҳўи кашам
بکن مست از زور می هو کشم
Ҳамаи рахти худ ҷониб ӯ кашам !
همه رخت خود جانب او کشم!
Биёи соқӣ эй нури чашмони ман
بیا ساقی ای نور چشمان من
Биёи соқӣ эй равнақи ҷони ман !
بیا ساقی ای رونق جان من!
зи ҳиҷри ту аз дидаам рафтаи нур
ز هجر تو از دیدهام رفته نور
Мем даҳ ки даврами зи ақлу шуъӯр !
میم ده که دورم ز عقل و شعور!