Нагардад ёрб ин фархундаи манзил , холӣ аз меҳмон

نگردد یارب این فرخنده منزل، خالی از مهمان

з рӯй чун гули ёрон буд пайвастаи гулрезон

ز روی چون گل یاران بود پیوسته گلریزان

Набошад бар дару девори он , ойӣнаҳо ҳар сӯ

نباشد بر در و دیوار آن، آیینه ها هر سو

Ки ҳар як ҳаст чашми интизорӣ бар раҳи меҳмон

که هر یک هست چشم انتظاری بر ره مهمان

зи бас афтодааст айвони ин зебои банно , дилкаш

ز بس افتاده است ایوان این زیبا بنا، دلکش

Бичишам дилбарон монад , ки бошад туррааш мижгон

بچشم دلبران ماند، که باشد طره اش مژگان

Аз он чун хонаи ойӣнаи лабрез сафо бошад

از آن چون خانه آیینه لبریز صفا باشد

Ки равшан шуд чароғаш аз сафои мақдами ёрон

که روشن شد چراغش از صفای مقدم یاران

Дар он аз боди дасти афшонии рақси нишоти дил

در آن از باد دست افشانی رقص نشاط دل

Аҷаб набӯд , фитодаи мавҷ агар бар шишаи алвон

عجب نبود، فتاده موج اگر بر شیشه الوان

Биравӣ икдгр ғалтид дар боғаши гулу сунбул

بروی یکدگر غلتید در باغش گل و سنبل

Ту гӯйии ин чаман хӯрдааст , оби гавҳари ғалтон

تو گویی این چمن خورده است، آب گوهر غلتان

Азизон чун зи ман ҷустанди таърихи баннои он

عزیزان چون ز من جستند تاریخ بنای آن

Бигуфтам : « боди ин зебои иморати маҷмаъи некон » !

بگفتم:«باد این زیبا عمارت مجمع نیکان »!