Дили мо ба даври рӯяти зи чаман фироқ дорад
دل ما به دور رویت ز چمن فَراغ دارد
Ки чу сарв пойбандаст ва чу лола доғ дорад
که چو سرو پایبند است و چو لاله داغ دارد
Сари мо Фрўнёид ба камони абрӯии кас
سرِ ما فرونیآید به کمانِ ابروی کَس
Ки даруни гӯшаи гирон , зи ҷаҳон фироқ дорад
که درون گوشهگیران، ز جهان فَراغ دارد
зи бунафша тоб дорам ки зи зулф ӯ занад дам
ز بنفشه تاب دارم که ز زلفِ او زند دم
Ту сиёҳ кам баҳои байн , ки чаҳ дар димоғ дорад !
تو سیاهِ کمبها بین، که چه در دِماغ دارد!
Ба чамани хиром ва бингар бар тахти гул ки лола
به چمن خرام و بنگر برِ تختِ گل که لاله
Ба надим шоҳ монад ки ба каф аёғ дорад
به ندیمِ شاه مانَد که به کف ایاغ دارد
Шаби зулмату биёбон , ба куҷои тавон расӣдан ?
شبِ ظلمت و بیابان، به کجا توان رسیدن؟
Магари он ки шамъи рӯят ба раҳам чароғ дорад
مگر آن که شمعِ رویات به رَهَم چراغ دارد
Ману шамъ субҳгоҳӣ сазад ар ба ҳам бгриим
من و شمعِ صبحگاهی سِزَد ار به هم بِگرییم
Ки бсухтем ва аз мо бути мо фироқ дорад
که بسوختیم و از ما بتِ ما فراغ دارد
Сазадам чу абри баҳман ки бар ин чамани бгрим
سِزَدم چو ابرِ بهمن که بر این چمن بِگریَم
Тараби ошёни булбул , бингар ки зоғ дорад
طرب آشیانِ بلبل، بنگر که زاغ دارد
Сари дарс ишқ дорад дили дардманди ҳофиз
سرِ درسِ عشق دارد دلِ دردمند حافظ
Ки на хотири тамошо на ҳавоӣ боғ дорад
که نه خاطرِ تماشا نه هوای باغ دارد