Сӯфии ниҳоди дому сари ҳуққа , боз кард
صوفی نَهاد دام و سَرِ حُقِّه، باز کَرْد
Бунёди макр бо фалаки ҳуққа боз кард
بُنْیادِ مَکْر با فَلَکِ حُقِّهباز کَرْد
Бозии чархи бишиканадаши байза дар кулоҳ
بازیِّ چَرْخ بِشْکَنَدَش بِیْضِه دَر کُلاه
Зеро ки арзи шӯъбада бо аҳл роз кард
زیرا که عَرْضِ شُعْبَدِه با اَهْلِ راز کَرْد
Соқии биё ки шоҳиди раънои суфиён
ساقی! بیا! که شاهِدِ رَعْنایِ صوفیان
Дигар ба ҷилва омаду оғоз ноз кард
دیگَر به جِلْوِه آمد و آغازِ ناز کَرْد
Ин мутриб аз куҷост ки сози Ироқи сохт ?
این مُطْرِب اَز کُجاست که سازِ عِراق ساخت؟
Ва оҳанги бозгашт ба роҳ ҳиҷоз кард
وآهَنْگِ بازْگَشْت به راهِ حِجاز کَرْد؟
эй дили биё ки мо ба паноҳ худо рӯем
ای دِل! بیا! که ما بِه پَناهِ خُدا رَویم
Зончи остини кӯтаҳу даст дароз кард
زآنْچ آسْتینِ کوتَه و دَسْتِ دِراز کَرْد
Санъат макун ки ҳар ки муҳаббат на рости бохт
صَنْعَت مَکُن که هَرکِه مُحَبَّت، نَه راسْت باخْت
Ишқаш ба рӯй дил дар маънӣ фароз кард
عِشْقَش به رویِ دِل، دَرِ مَعْنی، فَراز کَرْد
Фардо ки пешгоҳ ҳақиқат шавад падед
فَرْدا که پیشگاهِ حَقیقَت شَوَد پَدید
Шармандаи раҳравӣ , ки амал бар муҷоз кард
شَرْمَنْدِه رَهْرُوی کِه عَمَل بَر مَجاز کَرْد
эй Кебеки хуши хироми куҷо май рӯй ? боист
اِی کَبْکِ خوشخُرام! کُجا میرَوی؟ بِایست!
Ғарра машав ки гурбаи зоҳид намоз кард
غَرِّه مَشو! که گُرْبِهٔ زاهِد، نَماز کَرْد
Ҳофиз макун маломати риндон ки дар азал
«حافِظ»! مَکُن مَلامَتِ رِنْدان! که دَر اَزَل
Моро худои зи зуҳди риё бениёз кард
ما را خُدا زِ زُهْدِ ریا، بینیاز کَرْد