Рӯ бар раҳаши ниҳодам ва бар ман гузар накард
رو بر رَهَش نهادم و بر من گذر نکرد
Сад лутфи чашми доштам ва як назар накард
صد لطف چشم داشتم و یک نظر نکرد
Сайли сиришки мо зи дилаши кин ба дар набард
سیلِ سرشک ما ز دلش کین به در نَبُرد
Дар санги хораи қатраи борон асар накард
در سنگِ خاره قطرهٔ باران اثر نکرد
ё раби ту он ҷавони диловари нигоҳи дор
یا رب تو آن جوانِ دلاور نگاهدار
Каз тири оҳ гӯша нишинон ҳазар накард
کز تیرِ آهِ گوشهنشینان حذر نکرد
Моҳӣу мурғи дӯши зи афғон ман нахуфт
ماهی و مرغْ دوش ز افغانِ من نَخُفت
Ваон шӯхи дидаи байн ки сар аз хоби брнкрд
وان شوخْدیده بین که سر از خواب برنکرد
Май хостам ки мирмши андари қадам чу шамъ
میخواستم که میرَمَش اندر قدم چو شمع
ӯ худ гузар ба мо чу насим саҳар накард
او خود گذر به ما چو نسیمِ سحر نکرد
Ҷонои кадоми сангдил бекифоят аст
جانا کدام سنگدلِ بیکفایت است
Кови пеши захми теғи ту ҷонро сипар накард ?
کاو پیشِ زخمِ تیغِ تو جان را سپر نکرد؟
Калаки забони бурӣдаи ҳофиз дар анҷуман
کِلکِ زبانبریدهٔ حافظ در انجمن
Бо кас нагуфт рози ту то тарк сар накард
با کس نگفت رازِ تو تا تَرکِ سر نکرد