Дидӣ эй дил ки ғами ишқи дгрбор чаҳ кард
دیدی ای دل که غمِ عشق دگربار چه کرد؟
Чун бишуд дилбар ва бо ёри вафодор чаҳ кард
چون بشد دلبر و با یارِ وفادار چه کرد
Оҳ аз он наргиси ҷодӯ ки чаҳ бозӣ ангехт
آه از آن نرگسِ جادو که چه بازی انگیخت
Оҳ аз он маст ки бо мардуми ҳушёр чаҳ кард
آه از آن مست که با مردمِ هشیار چه کرد
Ашки ман ранг шафақ ёфт з бе Меҳрии ёр
اشکِ من رنگِ شفق یافت ز بیمِهری یار
Толеъ бе шафқати байн ки дар ин кор чаҳ кард
طالعِ بیشفقت بین که در این کار چه کرد
Барқӣ аз манзил Лайлӣ бадарахшед саҳар
برقی از منزلِ لیلی بدرخشید سحر
Ваа ки бо хирмани маҷнӯни дили аФгор чаҳ кард
وَه که با خرمنِ مجنونِ دلافگار چه کرد
Соқиои ҷом майам даҳ ки нигорандаи ғайб
ساقیا جامِ مِیام دِه که نگارندهٔ غیب
Нест маълум ки дар пардаи асрор чаҳ кард
نیست معلوم که در پردهٔ اسرار چه کرد
Он ки пурнақш зад ин доираи миное
آن که پُرنقش زد این دایرهٔ مینایی
Кас надонист ки дар гардиши паргор чаҳ кард
کس ندانست که در گردشِ پرگار چه کرد
Фикри ишқи оташи ғам дар дил ҳофиз заду сӯхт
فکرِ عشق آتشِ غم در دلِ حافظ زد و سوخت
Ёр дерина бибинед ки бо ёр чаҳ кард
یارِ دیرینه ببینید که با یار چه کرد