эй шоҳиди қудсӣ , ки кашад банди ниқобат ?
ای شاهد قدسی، کِه کَشَد بند نقابت؟
Ваии мурғи биҳиштӣ , ки диҳад донау обат ?
وی مرغ بهشتی، که دهد دانه و آبت؟
Хобам бишуд аз дида дар ин фикри ҷигарсӯз
خوابم بشد از دیده در این فکر جگرسوز
Коғўш ки шуд манзили осоишу хобат ?
کآغوشِ که شد منزل آسایش و خوابت؟
Дарвеш наме пурсӣу тарсам ки набошад
درویش نمیپرسی و ترسم که نباشد
Андешаи омурзишу пурвои савобат
اندیشهٔ آمرزش و پروای ثوابت
Роҳи дил ушшоқ зад он чашми хуморӣ
راه دل عشّاق زد آن چشم خماری
Пайдост аз ин шева ки мастаст шаробат
پیداست از این شیوه که مست است شرابت
Тирӣ ки задӣ бар дилам аз ғамза хато рафт
تیری که زدی بر دلم از غمزه خطا رفت
То боз чаҳ андеша кунад рои савобат
تا باز چه اندیشه کند رأی صوابت
Ҳар нолау фарёд ки кардам нишнидӣ
هر ناله و فریاد که کردم نشنیدی
Пайдост нигоро ки баландаст ҷанобат
پیداست نگارا که بلند است جَنابت
Давраст сари об аз ин бодия , ҳаши дор
دور است سر آب از این بادیه، هشدار
То ғӯли биёбони нФрибд ба саробат
تا غول بیابان نفریبد به سرابت
То дар раҳи перӣ ба чаҳ ойин рӯй эй дил
تا در ره پیری به چه آیین رَوی ای دل
Борӣ ба ғалат сарф шуд айёми шабобат
باری به غلط صرف شد ایّامِ شبابت
эй қасри дили афрӯз ки манзилгаҳи инсӣ
ای قصرِ دلافروز که منزلگهِ انسی
ё раби мкноди офати айём , харобат
یا رب مَکُناد آفتِ ایّام، خرابت
Ҳофиз на ғуломӣаст ки аз хоҷаи гурезад
حافظ نه غلامیست که از خواجه گریزد
Сулҳӣ куну бозо ки харобами зи итобат
صلحی کن و بازآ که خرابم ز عِتابت