Ба ҳасану халқу вафои кас ба ёр мо нарасад
به حسن و خُلق و وفا کس به یارِ ما نرسد
Туро дар ин сухани инкори кор мо нарасад
تو را در این سخن، انکارِ کارِ ما نرسد
Агар чаҳ ҳасани фурӯашон ба ҷилва омада анд
اگرچه حُسنفروشان به جلوه آمدهاند
Касе ба ҳасану малоҳат ба ёр мо нарасад
کسی به حُسن و ملاحت به یارِ ما نرسد
Ба ҳақи суҳбати дерин ки ҳеҷ муҳаррами роз
به حق صحبت دیرین که هیچ محرمِ راز
Ба ёри як ҷиҳати ҳақи гузор мо нарасад
به یارِ یک جهت حقگزارِ ما نرسد
Ҳазор нақш барояд зи калаки сунъ ва яке
هزار نقش برآید ز کِلکِ صُنع و یکی
Ба дилпазирии нақшнигор мо нарасад
به دلپذیری نقشِ نگارِ ما نرسد
Ҳазор нақд ба бозори коиноти оранд
هزار نقد به بازارِ کائنات آرند
Яке ба сиккаи соҳиби айёр мо нарасад
یکی به سکهٔ صاحب عیارِ ما نرسد
Дареғи қофилаи умри ки он чунон рафтанд
دریغ قافله عمر کآنچنان رفتند
Ки гирдашон ба ҳавои диёр мо нарасад
که گَردشان به هوایِ دیارِ ما نرسد
Дило зи ранҷ ҳасудон маранҷ ва восиқ бош
دلا ز رنجِ حسودان مرنج و واثق باش
Ки бад ба хотири умедвор мо нарасад
که بد به خاطرِ امیدوارِ ما نرسد
Чунон бизӣ ки агар хоки раҳи шӯии кас ро
چنان بِزی که اگر خاکِ ره شوی کس را
Ғубори хотирӣ аз раҳгузор мо нарасад
غبارِ خاطری از رهگذارِ ما نرسد
Бсухт ҳофизу тарсам ки шарҳи қисса ӯ
بسوخت حافظ و ترسم که شرحِ قصهٔ او
Ба самъи Подшаҳи комгор мо нарасад
به سمعِ پادشهِ کامگارِ ما نرسد