Ману инкори шароб ! ин чаҳ ҳикоят бошад ?
من و انکارِ شراب! این چه حکایت باشد؟
Ғолибан ин қадарами ақл ва кифоят бошад
غالباً این قَدَرَم عقل و کِفایت باشد
То ба ғояти раҳ майхона наме донистам
تا به غایت رهِ میخانه نمیدانستم
Вар на мастурии мо то ба чаҳ ғоят бошад
ور نه مستوری ما تا به چه غایت باشد
Зоҳиду аҷабу намоз ва ману мастӣу ниёз
زاهد و عجب و نماز و من و مستی و نیاز
То туро худ зи миён бо ки аноят бошад
تا تو را خود ز میان با که عنایت باشد
Зоҳид ар роҳ ба риндии набард маъзӯр аст
زاهد ار راه به رندی نَبَرَد معذور است
Ишқ корӣаст ки мавқуф ҳидоят бошад
عشق کاریست که موقوف هدایت باشد
Ман ки шабҳо раҳ тақво задаам бо дафу чанг
من که شبها رهِ تقوا زدهام با دف و چنگ
Ин замони сар ба раҳи орм чаҳ ҳикоят бошад ?
این زمان سر به ره آرَم؟ چه حکایت باشد!
Бандаи пери Муғонам ки з ҷаҳлам барраанд
بندهٔ پیرِ مغانم که ز جهلم بِرَهانْد
Пери мо ҳар чаҳ кунад айн аноят бошад
پیرِ ما هر چه کُنَد عینِ عنایت باشد
Дӯш аз ин ғуссаи нхФтм ки рафиқӣ ме гуфт
دوش از این غصه نَخُفتَم که رفیقی میگفت
Ҳофиз ар маст буд ҷой шикоят бошад
«حافظ ار مست بُوَد جایِ شکایت باشد»