Хушаст хилват агар ёри ёр ман бошад
خوش است خلوت اگر یار یارِ من باشد
На ман бисӯзам ва ӯ шамъ анҷуман бошад
نه من بسوزم و او شمعِ انجمن باشد
Ман он нигини сулаймон ба ҳеҷ нстонм
من آن نگینِ سلیمان به هیچ نَسْتانَم
Ки гоҳи гоҳ бар ӯ даст аҳриман бошад
که گاه گاه بر او دستِ اهرمن باشد
Равои мадори худоё ки дар ҳарими висол
روا مدار خدایا که در حریمِ وصال
Рақиби муҳарраму ҳурмони насиб ман бошад
رقیب محرم و حِرمان نصیبِ من باشد
эй гӯи мФкни сояи шарафи ҳаргиз
هُمای گو مَفِکَن سایهٔ شرف هرگز
Дар он диёр ки тӯтӣ кам аз заған бошад
در آن دیار که طوطی کم از زَغَن باشد
Баёни шавқ чаҳ ҳоҷат ? ки сӯзи оташи дил
بیانِ شوق چه حاجت؟ که سوز آتش دل
Тавон шинохти зи сӯзӣ ки дар сухан бошад
توان شناخت ز سوزی که در سخن باشد
Ҳавои кӯии ту аз сар намеравад оре
هوایِ کویِ تو از سر نمیرود آری
Ғарибро дили саргашта бо ватан бошад
غریب را دلِ سرگشته با وطن باشد
Ба сони сӯсан агар даҳ забон шавад ҳофиз
به سانِ سوسن اگر دَهزبان شود حافظ
Чу ғунчаи пеши тўоши меҳр бар даҳан бошад
چو غنچه پیشِ تواش مُهر بر دهن باشد