эй пистаи ту ханда зада бар ҳадиси қанд
ای پستهٔ تو خنده زده بر حدیثِ قند
Муштоқам аз барои худои як шукри биханд
مشتاقم از برای خدا یک شِکَر بخند
Тӯбои зи қомат ту наёрад ки дам занад
طوبی ز قامتِ تو نیارد که دَم زند
Зин қисса бигузарам ки сухан мешавад баланд
زین قصّه بگذرم که سخن میشود بلند
Хоҳӣ ки брнхиздт аз дида равад хӯн
خواهی که برنخیزدت از دیده رودِ خون
Дил дар вафоӣ суҳбат равад касон мабанд
دل در وفایِ صحبتِ رودِ کسان مَبَند
Гар ҷилва май намое вагар таъна май занӣ
گر جلوه مینمایی و گر طعنه میزنی
Мо нестем муътақиди шайхи худписанд
ما نیستیم معتقدِ شیخِ خودپسند
зи ошуфтагии ҳоли ман огоҳ кӣ шавад ?
ز آشفتگیِ حالِ من آگاه کِی شود؟
Онро ки дил нагашт гирифтори ин каманд
آن را که دل نگشت گرفتارِ این کمند
Бозори шавқ гарм шуд он сарвқад куҷост ?
بازارِ شوق گرم شد آن سروْقد کجاست؟
То ҷони худ бар оташ рӯйиш кунам сапанд
تا جانِ خود بر آتش رویش کُنم سپند
Ҷое ки ёри мо ба шикарханда дам занад
جایی که یارِ ما به شِکَرخنده دَم زند
эй писта кистӣ ту , худоро ба худ маханд
ای پسته کیستی تو، خدا را به خود مخند
Ҳофиз чу тарки ғамза таркон наме кунӣ
حافظ چو تَرکِ غمزهٔ تُرکان نمیکنی
Доне куҷост ҷои ту ? хоразм ё Хуҷанд
دانی کجاست جای تو؟ خوارزم یا خُجَند