Ҳасби ҳолеи ннўштӣ ва шуд айёмӣ чанд
حَسْبِ حالی نَنِوِشتی و شد ایّامی چند
Муҳаррамии кӯ ки фиристам ба ту пайғомӣ чанд ?
مَحرمی کو که فرستم به تو پیغامی چند؟
Мо бидон мақсад олӣ натавонем расед
ما بدان مقصدِ عالی نتوانیم رسید
Ҳам магари пеш наад лутфи шумо гомӣ чанд
هم مگر پیش نَهَد لطفِ شما گامی چند
Чун май аз хам ба сабу рафту гули афканди ниқоб
چون مِی از خُم به سبو رفت و گُل افکند نقاب
Фурсати айши нигаҳи дор ва бизан ҷомӣ чанд
فرصتِ عیش نگه دار و بزن جامی چند
Қанди омехта бо гул на алоҷи дили мост
قندِ آمیخته با گُل نه علاجِ دلِ ماست
Бӯсае чанд баромез ба дашномӣ чанд
بوسهای چند برآمیز به دشنامی چند
Зоҳид аз кӯчаи риндон ба саломат бигузар
زاهد از کوچهٔ رندان به سلامت بگذر
То харобат накунад суҳбати бадномӣ чанд
تا خرابت نکند صحبتِ بدنامی چند
Айб май ҷумла чу гуфтӣ , ҳунараш низ бигӯ
عیبِ مِی جمله چو گفتی، هنرش نیز بگو
Нафй ҳикмат макун аз баҳри дили омӣ чанд
نفیِ حکمت مکن از بهرِ دلِ عامی چند
эй гадоёни хароботи худо ёр шумост
ای گدایانِ خرابات خدا یارِ شماست
Чашм анъом мадоред зи анъомӣ чанд
چشمِ اِنعام مدارید ز اَنعامی چند
Пери майхона чаҳ хуш гуфт ба дардии каши хеш
پیرِ میخانه چه خوش گفت به دُردیکشِ خویش
Ки магӯ ҳоли дили сӯхта бо хомӣ чанд
که مگو حالِ دلِ سوخته با خامی چند
Ҳофиз аз шавқи рухи меҳри фурӯғ ту бсухт
حافظ از شوقِ رخِ مِهرفروغِ تو بسوخت
Комгоро назарӣ кун сӯии нокомӣ чанд
کامگارا نظری کن سویِ ناکامی چند