Дӯши вақти саҳар аз ғусса наҷотам доданд
دوش وقتِ سَحَر، از غُصّه نجاتم دادند
Вондри он зулмати шаби об ҳаётам доданд
واندر آن ظلمتِ شب، آبِ حیاتم دادند
Бихўд аз шаъшааи партав зотам карданд
بیخود از شَعْشَعِهٔ پرتوِ ذاتم کردند
Бода аз ҷоми таҷаллӣ сифотам доданд
باده از جامِ تَجَلّیِّ صفاتم دادند
Чаҳ мубораки саҳарӣ буд ва чаҳ фархундаи шабӣ
چه مبارکسَحَری بود و چه فرخندهشبی
Он шаби қадар ки ин тоза баротам доданд
آن شبِ قدر که این تازهبراتم دادند
Баъд аз ин рӯй ману оинаи васфи ҷамол
بعد از این رویِ من و آینهٔ وصفِ جمال
Ки дар он ҷои хабар аз ҷилва зотам доданд
که در آن جا خبر از جلوهٔ ذاتم دادند
Ман агар комрўои гаштаму хўшдл чаҳ аҷаб ?
من اگر کامروا گشتم و خوشدل چه عجب؟
Мустаҳаққ будам ва инҳо ба закотам доданд
مستحق بودم و اینها به زکاتم دادند
Ҳотифи он рӯз ба ман муждаи ин давлат дод
هاتف آن روز به من مژدهٔ این دولت داد
Ки бидон ҷавру ҷафои сабр ва саботам доданд
که بِدان جور و جفا صبر و ثباتم دادند
Ин ҳамаи шаҳду шукр каз суханам май резад
این همه شهد و شِکر کز سخنم میریزد
Аҷри сбрист каз он шох наботам доданд
اَجرِ صبریست کز آن شاخِ نباتم دادند
Ҳиммати ҳофизу анфоси саҳархезон буд
همّتِ حافظ و انفاسِ سحرخیزان بود
Ки зи банди ғами айём наҷотам доданд
که ز بندِ غمِ ایّام نجاتم دادند