Дило бисӯз ки сӯзи ту корҳо бикунад
دِلا! بِسوز! که سوزِ تو، کارها بِکُنَد
Ниёзи ним шабии дафъи сад балои бикунад
نیازِ نیمشَبی، دَفْعِ صَد بَلا بِکُنَد
Итоби ёри парии чеҳра ошиқона бикаш
عِتابِ یارِ پَریچِهْرِه، عاشِقانِه بِکَش!
Ки як киришмаи талофии сад ҷафои бикунад
کِه یِک کِرِشْمِه، تَلافیِّ صَد جَفا بِکُنَد
зи малик то малакӯташ ҳиҷоб бурдоранд
زِ مُلْک تا مَلَکوتَش، حِجاب بَردارَنْد
Ҳар он ки хизмати ҷоми ҷаҳони намои бикунад
هَر آنکِه خِدْمَتِ جامِ جَهاننَما بِکُنَد
Табиби ишқи масеҳо дамасту мушфиқ , лек
طَبیبِ عِشْق، مَسیحادَم است و مُشْفِق، لیک
Чу дард дар ту набинад киро давои бикунад ?
چو دَرد، دَر تو نَبینَد؛ کِه را دَوا بِکُنَد؟
Ту бо худоӣ худ андоз кору дили хуши дор
تو با خدایِ خود اَنداز کار! و دِل، خوش دار!
Ки раҳм агар накунад муддаии худои бикунад
کِه رَحْم اَگَر نَکُنَد مُدَّعی، خُدا بِکُنَد
зи бахти хуфтаи малулам , буд ки бедорӣ
زِ بَخْتِ خُفْتِه مَلولَم، بُوَد که بیداری
Ба вақти фотиҳаи субҳ , як дуои бикунад ?
بِه وَقْتِ فاتِحِهٔ صُبْح، یک دُعا بِکُنَد؟
Бсухт ҳофизу бӯе ба зулфи ёри набард
بِسوخْت «حافِظ» و بویی به زُلْفِ یار نَبُرْد
Магари далолати ин давлаташи сабои бикунад
مَگَر دِلالَتِ این دولَتَش، صَبا بِکُنَد