Калаки мишкӣни ту рӯзӣ ки зи мо ёд кунад
کِلْکِ مُشْکینِ تو، روزی که زِ ما یاد کُنَد
Бабради аҷри ду сад банда ки озод кунад
بِبَرَد اَجْرِ دو صَد بَنْدِه کِه آزاد کُنَد
Қосиди манзили слмӣ ки саломати бодаш
قاصِدِ مَنْزِلِ سَلْمیٰ که سَلامَت بادَش
Чаҳ шавадгар ба саломии дили мо шод кунад ?
چِه شَوَد، گَر بِه سَلامی، دِلِ ما، شاد کُنَد؟
Имтиҳон кун ки басии ганҷи муродати бидиҳанд
اِمْتِحان کُن! کِه بَسی گَنْجِ مُرادَت بِدَهَنْد
Гар харобӣ чу маро , лутфи ту обод кунад
گَر خَرابی چو مَرا، لُطْفِ تو، آباد کُنَد
ё раби андари дили он хусрав ширин андоз
یا رَب! اَنْدَر دِلِ آن خُسْروِ شیرین اَنْداز
Ки ба раҳмати гузарӣ бар сар Фарҳод кунад
کِه بِه رَحْمَت، گُذَری بَر سَرِ فَرْهاد کُنَد!
Шоҳро ба буд аз тоъати садсолау зуҳд
شاه را بِهْ بُوَد اَز طاعَتِ صَدسالِه و زُهْد
Қадари як соъатаи умрӣ ки дар ӯ , дод кунад
قَدْرِ یک ساعَتِه عُمْری کِه دَر او، داد کُنَد
Ҳолиё ишваи нози ту зи бунёдами барад
حالیا، عِشْوِهٔ نازِ تو، زِ بُنْیادَم بُرْد
То дигарбораи ҳакӣмона чаҳ бунёд кунад
تا دِگَربارِه، حَکیمانِه، چِه بُنْیاد کُنَد
Гавҳари поки ту аз мадҳат мо мустағнӣаст
گوهَرِ پاکِ تو از مِدْحَتِ ما مُسْتَغْنیست
Фикри машшота чаҳ бо ҳасан худодод кунад ?
فِکْرِ مَشّاطِه، چِه با حُسْنِ خُداداد کُنَد؟
Раҳ набардем ба мақсӯди худ андари Широз
رَه نَبُرْدیم بِه مَقْصودِ خود اَنْدَر شیراز
Хуррами он рӯз ки ҳофизи раҳ Бағдод кунад
خُرَّم آن روز که «حافِظ»، رَهِ بَغْداد کُنَد