Сарви чмони ман чаро майл чаман намекунад ?
سروِ چَمانِ من چرا میلِ چمن نمیکند؟
Ҳамдам гул намешавад ёд саман наме кунад
همدمِ گل نمیشود، یادِ سَمَن نمیکند
Даии гилае зи турра аш кардам ва аз сари фусӯс
دی گِلِهای ز طُرِّهاش، کردم و از سرِ فُسوس
Гуфт ки ин сиёҳи каҷ , гӯш ба ман наме кунад
گفت که «این سیاهکج، گوش به من نمیکند»
То дили ҳарзаи гирд ман рафт ба чини зулф ӯ
تا دلِ هرزهگَردِ من، رفت به چینِ زلفِ او
Зон сафари дарози худ азм ватан наме кунад
زان سفرِ درازِ خود، عزمِ وطن نمیکند
Пеши камони абрӯяши лоба ҳаме кунам вале
پیشِ کمانِ ابرویش، لابه همی کنم ولی
Гӯш кашидааст аз он гӯш ба ман наме кунад
گوش کشیده است از آن، گوش به من نمیکند
Бо ҳамаи атф доманат оядам аз сабои аҷаб
با همه عطفِ دامنت، آیدم از صبا عجب
Каз гузари ту хокро машк хутан наме кунад
کز گذرِ تو، خاک را، مُشکِ خُتَن نمیکند
Чун з насим мешавад зулфи бунафшаи пуршикан
چون ز نسیم میشود، زلفِ بنفشه پُرشِکَن
Ваа ки дилам чаҳ ёд аз он ъҳдшкн наме кунад
وه که دلم چه یاد از آن، عهدشکن نمیکند
Дил ба умед рӯй ӯ ҳамдам ҷон наме шавад
دل به امیدِ رویِ او، همدمِ جان نمیشود
Ҷон ба ҳавои кӯй ӯ хизмат тан наме кунад
جان به هوایِ کویِ او، خدمتِ تن نمیکند
Соқии сими соқи мангар ҳама дард ме диҳад
ساقیِ سیمساقِ من، گر همه دُرد میدهد
Кист ки тан чу ҷом май ҷумла даҳан намекунад ?
کیست که تن چو جامِ مِی، جمله دهن نمیکند؟
Дастхуш ҷафо макун оби рухам ки файзи абр
دستخوشِ جفا مَکُن، آبِ رُخَم که فیضِ ابر
Бе мадади сиришки ман дар адан наме кунад
بیمددِ سِرشکِ من، دُرِ عَدَن نمیکند
Куштаи ғамза ту шуд ҳофиз ношунида панд
کُشتهٔ غمزهٔ تو شد، حافظِ ناشنیدهپند
Теғ сазост ҳар киро дард сухан наме кунад
تیغ سزاست هر که را، دَرد، سخن نمیکند