Ёди боди он ки сари кӯии туами манзил буд
یاد باد آن که سرِ کویِ توام منزل بود
Дидаро равшанӣ аз хок дарат ҳосил буд
دیده را روشنی از خاکِ درت حاصل بود
Рост чун сӯсану гул аз асари суҳбати пок
راست چون سوسن و گل از اثرِ صحبتِ پاک
Бар забон буд марои он чаҳ туро дар дил буд
بر زبان بود مرا آنچه تو را در دل بود
Дил чу аз пери хиради нақл маъонӣ ме кард
دل چو از پیرِ خِرَد نَقلِ مَعانی میکرد
Ишқ мегуфт ба шарҳи он чаҳ бар ӯ мушкил буд
عشق میگفت به شرح آنچه بر او مشکل بود
Оҳ аз он ҷавру татовул ки дар ин домгаҳ аст
آه از آن جور و تَطاول که در این دامگَه است
Оҳ аз он сӯзу ниёзӣ ки дар он маҳфил буд
آه از آن سوز و نیازی که در آن محفل بود
Дар дилам буд ки бедӯст набошам ҳаргиз
در دلم بود که بیدوست نباشم هرگز
Чаҳ тавон кард ? ки саъии ману дили ботил буд
چه توان کرد؟ که سعیِ من و دل باطل بود
Дӯш бар ёди ҳарифон ба харобот шудам
دوش بر یادِ حریفان به خرابات شدم
Хам медидам , хӯн дар дилу по дар гул буд
خُمِ مِی دیدم، خون در دل و پا در گل بود
Баси бгштм ки бипурсам сабаби дарди фироқ
بس بِگَشتَم که بپرسم سببِ دردِ فِراق
Муфтии ақл дар ин масъалаи лоиъқл буд
مفتیِ عقل در این مسأله لایَعْقِل بود
Ростии хотами фирӯзаи бўосҳоқӣ
راستی خاتمِ فیروزهٔ بواسحاقی
Хуш дурахшид вале давлати мстъҷл буд
خوش درخشید ولی دولتِ مُستَعجِل بود
Дидӣ он қаҳқаҳаи Кебеки хиромони ҳофиз
دیدی آن قهقههٔ کبکِ خِرامان حافظ؟
Ки зи сарпанҷаи шоҳини қазои ғофил буд
که ز سرپنجهٔ شاهینِ قضا غافل بود