Қатли ин хаста ба шамшери ту тақдир набӯд
قتلِ این خسته به شمشیرِ تو تقدیر نبود
Вар на ҳеҷ аз дил бе раҳми ту тақсир набӯд
ور نه هیچ از دلِ بیرحمِ تو تقصیر نبود
Ман девона чу зулфи ту раҳо ме кардам
منِ دیوانه چو زلفِ تو رها میکردم
Ҳеҷ лоиқи терм аз ҳалқа занҷир набӯд
هیچ لایقترم از حلقهٔ زنجیر نبود
ё раби ин оинаи ҳасан чаҳ ҷавҳар дорад ?
یا رب این آینهٔ حُسن چه جوهر دارد؟
Ки дар ӯ оҳи марои қӯт таъсир набӯд
که در او آهِ مرا قُوَّتِ تأثیر نبود
Сари зи ҳасрат ба дар майкадаҳо бркрдм
سر ز حسرت به درِ میکدهها بَرکردم
Чун шносои ту дар савмиъаи як пер набӯд
چون شناسایِ تو در صومعه یک پیر نبود
Нозанинтар зи қадат дар чаман ноз нараст
نازنینتر ز قَدَت در چمنِ ناز نَرُست
Хуштар аз нақши ту дар олам тасвир набӯд
خوشتر از نقشِ تو در عالمِ تصویر نبود
То магари ҳамчуи сабои боз ба кӯии ту расм
تا مگر همچو صبا باز به کویِ تو رَسَم
Ҳосилами дӯш ба ҷузи нола шабгир набӯд
حاصلم دوش به جز نالهٔ شبگیر نبود
Он кашидам зи ту эй оташи ҳиҷрон ки чу шамъ
آن کشیدم ز تو ای آتشِ هجران که چو شمع
Ҷузи фанои худам аз дасти ту тадбир набӯд
جز فنای خودم از دستِ تو تدبیر نبود
Оятӣ буд азобанда ҳофиз бе ту
آیتی بود عذابْ اَنْدُهِ حافظ بی تو
Ки бар ҳеҷ касаши ҳоҷат тафсир набӯд
که بَرِ هیچ کَسَش حاجتِ تفسیر نبود