Чу бишинавӣ сухани аҳли дил , магӯ ки хатост
چو بشنوی سخنِ اهلِ دل، مگو که خطاست
Сухани шинос нае ҷони ман хато ин ҷост
سخنشناس نهای، جان من! خطا این جاست
Серум ба ?данеу уқбо фурӯ наме ояд
سرم به دنیی و عقبی فرو نمیآید
Табораки аллоҳ аз ин фитнаҳо ки дар сари мост
تبارک الله ازین فتنهها که در سرِ ماست
Дар андаруни ман хаста дил надонам кист
در اندرونِ منِ خستهدل ندانم کیست!
Ки ман хамӯшам ва ӯ дар фиғон ва дар ғавғост
که من خموشم و او در فغان و در غوغاست
Дилами зи парда бурун шуд куҷое эй мутриб
دلم ز پرده برون شد، کجایی ای مطرب؟
Бинол , ҳон ки аз ин пардаи кори мо ба навост
بنال، هان که از این پرده، کارِ ما به نواست
Маро ба кори ҷаҳони ҳаргиз илтифот набӯд
مرا به کارِ جهان هرگز التفات نبود
Рухи ту дар назари ман чунин хушаш орост
رخِ تو در نظرِ من چنین خوشش آراست
Нахуфтаам зи хаёлӣ ки май пазади дили ман
نخفتهام ز خیالی که میپزد دلِ من
Хумор сдшбаҳ дорам шробхонаҳ куҷост
خمارِ صد شبه دارم شرابخانه کجاست؟
Чунин ки савмиъа олӯда шуд зи хӯни дилам
چنین که صومعه آلوده شد ز خونِ دلم
Гарм ба бода бишуед ҳақ ба даст шумост
گَرَم به باده بشویید، حق به دستِ شماست
Аз он ба дайри Муғонам азиз ме доранд
از آن به دیرِ مغانم عزیز میدارند
Ки оташӣ ки намирад ҳамеша дар дили мост
که آتشی که نمیرد، همیشه در دلِ ماست
Чаҳ соз буд ки дар парда мезад он мутриб
چه ساز بود که در پرده میزد آن مطرب
Ки рафт умр ва ҳанузам димоғи пар з ҳавост
که رفت عمر و هنوزم دماغ پُر ز هواست
Нидои ишқи ту дишаб дар андарун доданд
ندای عشق تو دیشب در اندرون دادند
Фазои синаи ҳофиз ҳануз пари зи садост
فضایِ سینهٔ حافظ هنوز پر ز صداست