Ҷаҳон бар абрӯии ид аз ҳилол васма кашид
جهان بر ابرویِ عید از هِلال وَسمه کشید
Ҳилоли ид дар абрӯии ёр бояд дид
هِلال عید در ابرویِ یار باید دید
Шикастаи гашт чу пушти ҳилоли қомати ман
شکسته گشت چو پشتِ هلال قامتِ من
Камони абрӯии ёрам чу васмаи бозкшид
کمانِ ابرویِ یارم چو وَسمه بازکشید
Магари насими хатати субҳ дар чаман бигузашт
مگر نسیمِ خَطَت صبح در چمن بگذشت
Ки гул ба буии ту бар тан чу субҳ ҷома дарид
که گُل به بویِ تو بر تن چو صبح جامه درید
Набӯд чангу рубоб ва набеду авд , ки буд
نبود چنگ و رَباب و نَبید و عود، که بود
Гули вуҷӯди ман оғиштаи гулоб ва набед
گِلِ وجودِ من آغشتهٔ گلاب و نَبید
Биё ки бо ту бигӯям ғами малолати дил
بیا که با تو بگویم غمِ ملالتِ دل
Чаро ки бе ту надорам маҷол гуфт ва шунид
چرا که بی تو ندارم مَجالِ گفت و شَنید
Баҳоии васли тугар ҷон буд харидорам
بهایِ وصلِ تو گر جان بُوَد خریدارم
Ки ҷинси хуби мубсир ба ҳар чаҳ дид харид
که جنسِ خوب مُبَصِّر به هر چه دید خرید
Чу моҳ рӯй ту дар шом зулф ме дидам
چو ماهِ روی تو در شامِ زلف میدیدم
Шабам ба рӯй ту равшан чу рӯз ме гардид
شبم به رویِ تو روشن چو روز میگردید
Ба лаб расед марои ҷон ва барнаёмад ком
به لب رسید مرا جان و برنیامد کام
Ба сар расед умеду талаб ба сар нарасед
به سر رسید امید و طلب به سر نرسید
зи шавқ рӯй ту ҳофиз навишт ҳарфӣ чанд
ز شوقِ رویِ تو حافظ نوشت حرفی چند
Бихон зи назмаш ва дар гӯш кун чу марворид
بخوان ز نظمش و در گوش کن چو مروارید