Матлаби тоъату паймону салоҳ аз ман маст
مطلب طاعت و پیمان و صلاح از من مست
Ки ба паймонаи кашӣ шуҳра шудам рӯзи аласт
که به پیمانهکشی شهره شدم روز الست
Ман ҳамон дам ки вузӯи сохтам аз чашмаи ишқ
من همان دم که وضو ساختم از چشمهٔ عشق
Чор такбир задам яксара бар ҳар чаҳ ки ҳаст
چار تکبیر زدم یکسره بر هرچه که هست
намебидиҳ то даҳумати огаҳӣ аз сари қазо
می بده تا دهمت آگهی از سِرّ قضا
Ки ба рӯй ки шудам ошиқ ва аз буи ки маст
که به روی که شدم عاشق و از بوی که مست
Камари кӯҳ камаст аз камари мӯри ин ҷо
کمر کوه کم است از کمر مور اینجا
Ноумед аз дар раҳмат машав эй бодаи параст
ناامید از در رحمت مشو ای بادهپرست
Ба ҷузи он наргиси мастона ки чашмаши мрсод
بجز آن نرگس مستانه که چشمش مرساد
Зери ин торами фирӯза касе хуш нанишаст
زیر این طارم فیروزه کسی خوش ننشست
Ҷони фидои даҳанаши бод ки дар боғи назар
جان فدای دهنش باد که در باغ نظر
Чамани орои ҷаҳон , хуштар аз ин ғунча набаст
چمن آرای جهان، خوشتر از این غنچه نبست
Ҳофиз аз давлати ишқи ту сулаймонӣ шуд
حافظ از دولت عشق تو سلیمانی شد
Яъне аз васл тўош нест ба ҷузи бод ба даст
یعنی از وصل تواَش نیست بجز باد به دست