Идасту охири гулу ёрон дар интизор
عید است و آخِرِ گُل و یاران در انتظار
Соқӣ ба рӯй шоҳ бибин моҳ ва ме биор
ساقی به رویِ شاه ببین ماه و مِی بیار
Дил баргирифта будам аз айёми гул , вале
دل برگرفته بودم از ایّام گُل، ولی
Кории бикради ҳиммати покони рӯзаи дор
کاری بِکَرد همّت پاکانِ روزه دار
Дил дар ҷаҳон мабанд ва ба мастӣ савол кун
دل در جهان مَبَند و به مستی سؤال کن
Аз файзи ҷому қиссаи ҷамшеди комгор
از فیض جام و قصهٔ جمشیدِ کامگار
Ҷузи нақди ҷон ба даст надорам шароби кӯ ?
جز نقدِ جان به دست ندارم شراب کو؟
Кон низ бар киришма соқӣ кунам нисор
کان نیز بر کرشمهٔ ساقی کُنم نثار
Хуш давлатӣаст хурраму хуши хусравии Карим
خوش دولتیست خرّم و خوش خسروی کریم
ё раби зи чашми захми замонаши нигоҳи дор
یا رب ز چشمْ زخمِ زمانش نگاه دار
Май хур ба шеъри банда ки зебӣ дигар диҳад
مِی خور به شعرِ بنده که زیبی دگر دهد
Ҷоми мурассаъи ту бад-ӣн дар шоҳвор
جامِ مُرَصَّعِ تو بدین دُرِّ شاهوار
Гар фӯт шуд сҳўр чаҳ нуқсон сабӯҳ ҳаст
گر فوت شد سَحور چه نقصان صَبوح هست
Аз мекунанд рӯзаи гшои толибони ёр
از مِی کنند روزه گشا طالبانِ یار
Зонҷо ки пардаи пӯшии афв Карим туаст
زانجا که پرده پوشیِ عفوِ کریمِ توست
Бар қалб мо бубахш ки нақдӣаст кам айёр
بر قلب ما ببخش که نقدیست کم عیار
Тарсам ки рӯзи ҳашари Аннан бар Аннан равад
ترسم که روزِ حشر عِنان بر عِنان رَوَد
Тасбеҳи шайху хирқаи ринди шробхўор
تسبیحِ شیخ و خرقهٔ رندِ شرابخوار
Ҳофиз чу рафт рӯзау гул низ ме равад
حافظ چو رفت روزه و گل نیز میرود
Ночори бодаи нӯш ки аз даст рафт кор
ناچار باده نوش که از دستْ رفتْ کار