Гар буд умр , ба майхонаи расми бор дигар
گر بُوَد عمر، به میخانه رَسَم بارِ دِگَر
Биҷуз аз хизмат риндон накунам кор дигар
بجز از خدمتِ رندان نکنم کارِ دِگَر
Хуррами он рӯз ки бо дида гирён биравам
خُرَّم آن روز که با دیدهٔ گریان بِرَوَم
То занами об дар майкадаи як бор дигар
تا زنم آب درِ میکده یک بارِ دگر
Маърифат нест дар ин қавми худоро сабабӣ
معرفت نیست در این قوم خدا را سَبَبی
То барам гавҳари худро ба харидор дигар
تا بَرَم گوهرِ خود را به خریدارِ دگر
Ёр агар рафту ҳақи суҳбат дерин нашнохт
یار اگر رفت و حقِ صحبتِ دیرین نشناخت
Ҳоши ллаҳ ки рӯми ман зи паии ёр дигар
حاشَ لِلَّه که رَوَم من ز پِیِ یارِ دگر
Гар мусоид шавадам доираи чархи кабӯд
گر مساعد شَوَدَم دایرهٔ چرخِ کبود
Ҳам ба даст оварамаш боз ба паргор дигар
هم به دست آورمش باز به پرگارِ دگر
Офият май талабади хотирам ар бигузоранд
عافیت میطلبد خاطرم ار بگذارند
Ғамзаи шӯхаш ва он турраи таррор дигар
غمزهٔ شوخَش و آن طرهٔ طَرّارِ دگر
Рози сарбастаи мо байн ки ба дастон гуфтанд
راز سربستهٔ ما بین که به دستان گفتند
Ҳар замон бо дафу не бар сари бозор дигар
هر زمان با دف و نی بر سرِ بازارِ دگر
Ҳар дам аз дард бинолам ки фалак ҳар соъат
هر دم از درد بنالم که فلک هر ساعت
Кунадам қасди дили риш ба озор дигар
کُنَدَم قصدِ دلِ ریش به آزارِ دگر
Бозгуем на дар ин воқеа ҳофиз танҳост
بازگویم نه در این واقعه حافظ تنهاست
Ғарқаи гаштанд дар ин бодия бисёр дигар
غرقه گشتند در این بادیه بسیارِ دگر