Юсуф гум гашта бозояд ба канъон , ғам махӯр
یوسفِ گمگشته بازآید به کنعان، غم مخور
Кулба аҳзон шавад рӯзии гулистон , ғам махӯр
کلبهٔ احزان شَوَد روزی گلستان، غم مخور
эй дили ғмдидаҳ , ҳолат ба шавад , дил бад макун
ای دل غمدیده، حالت بِه شود، دل بَد مکن
Венаи сари шӯрида боз ояд ба сомон ғам махӯр
وین سرِ شوریده باز آید به سامان غم مخور
Гар баҳор умр бошад боз бар тахти чаман
گر بهارِ عمر باشد باز بر تختِ چمن
Чатри гул дар сари кашӣ , эй мурғи хўшхўон ғам махӯр
چتر گل در سر کَشی، ای مرغِ خوشخوان غم مخور
Даври гардунгар ду рӯзӣ бар мурод мо нарафт
دورِ گردون گر دو روزی بر مرادِ ما نرفت
Доимо яксон набошад ҳоли даврон ғам махӯр
دائماً یکسان نباشد حالِ دوران غم مخور
Ҳон машав навмед чун воқиф нае аз сари ғайб
هان مَشو نومید چون واقِف نِهای از سِرِّ غیب
Бошад андари пардаи бозиҳои пинҳон ғам махӯр
باشد اندر پرده بازیهایِ پنهان غم مخور
эй дил ар сайли фано бунёд ҳастӣ барканд
ای دل اَر سیلِ فنا بنیادِ هستی بَرکَنَد
Чун туро Нӯҳаст кштибон , зи тӯфон ғам махӯр
چون تو را نوح است کشتیبان، ز طوفان غم مخور
Дар биёбонгар ба шавқи каъба хоҳӣ зад қадам
در بیابان گر به شوقِ کعبه خواهی زد قدم
Сарзанишҳо гар кунад хори муғелон ғам махӯр
سرزنشها گر کُنَد خارِ مُغیلان غم مخور
Гарчи манзили бас хатарнокасту мақсади баси баъӣд
گرچه منزل بس خطرناک است و مقصد بس بعید
Ҳеҷ роҳӣ нест , ки онро нест поён , ғам махӯр
هیچ راهی نیست کآن را نیست پایان، غم مخور
Ҳоли мо дар фурқати ҷонону иброми рақиб
حال ما در فُرقت جانان و اِبرامِ رقیب
Ҷумла медонад худои ҳоли гардон ғам махӯр
جمله میداند خدایِ حالْگردان غم مخور
ҲоФзо дар кунҷи фақру хилвати шабҳои тор
حافظا در کُنجِ فقر و خلوتِ شبهایِ تار
То буд вирдати дуоу дарси қуръон ғам махӯр
تا بُوَد وِردَت دعا و درس قرآن غم مخور