Ҳазор шукр ки дидам ба коми хешати боз
هزار شُکر که دیدم به کامِ خویشت باز
з рӯй сидқ ва сафо гашта бо дилами дмсоз
ز رویِ صدق و صفا گشته با دلم دَمساز
Рўндгони тариқати раҳ бало сипаранд
رَوَندگانِ طریقت رَهِ بلا سِپَرَند
Рафиқи ишқ чаҳ ғам дорад аз нишебу фароз
رفیقِ عشق چه غم دارد از نَشیب و فراز
Ғами ҳабиби ниҳон ба з гуфту гӯии рақиб
غمِ حبیب نهان بِه ز گفت و گوی رقیب
Ки нест синаи арбоби кӣна , муҳаррами роз
که نیست سینهٔ اربابِ کینه، محرمِ راز
Агар чаҳ ҳасани ту аз ишқ ғайр мустағнӣаст
اگر چه حُسنِ تو از عشقِ غیر مُستَغنیست
Ман он ним ки аз ин ъшқбозӣ оем боз
من آن نیَم که از این عشقبازی آیم باز
Чаҳ гӯямат ки зи сӯзи дарун чаҳ май байнам
چه گویَمَت که ز سوزِ درون چه میبینم
з ашк пресс ҳикоят ки ман ним ғаммоз
ز اشک پُرس حکایت که من نیَم غَمّاز
Чаҳ фитна буд ки машшота қазо ангехт
چه فتنه بود که مَشّاطِهٔ قضا انگیخت
Ки кард наргиси масташи сияҳ ба серумаи ноз
که کرد نرگسِ مستش سیَه به سرمهٔ ناز
Бад-ӣни сипос ки маҷлис мунаввараст ба дӯст
بدین سپاس که مجلس مُنَوَّر است به دوست
?герат чу шамъ ҷафое расад бисӯз ва бисоз
گَرَت چو شمع جفایی رِسَد بسوز و بساز
Ғарази киришма ҳасанаст вар на ҳоҷат нест
غَرَض کِرشمهٔ حُسن است ور نه حاجت نیست
Ҷамоли давлати Маҳмӯдро ба зулфи Аёз
جمالِ دولتِ محمود را به زلفِ ایاز
Ғазали сароеи ноҳиди сарфае набард
غزل سُرایی ناهید صرفهای نَبَرَد
Дар он мақом ки ҳофиз баровард овоз
در آن مَقام که حافظ برآورد آواز