Дро ки дар дили хастаи тавон даройади боз
درآ که در دلِ خسته، توان درآید باز
Биё ки дар тани мурдаи равони даройади боз
بیا که در تنِ مُرده، رَوان درآید باز
Биё ки фурқати ту чашми ман чунон дар баст
بیا که فُرقَتِ تو، چشمِ من چنان در بست
Ки фатҳи боби висолати магари кушояди боз
که فتحِ بابِ وصالت مگر گشاید باز
Ғамӣ ки чун сипаҳи занг , малик дил бигирифт
غمی که چون سپهِ زنگ، مُلکِ دل بگرفت
зи хайли шодии рӯм рахт задойад боз
ز خیلِ شادیِ رومِ رُخَت زُدایَد باز
Ба пеши оинаи дил ҳар он чаҳ ме дорам
به پیشِ آینهٔ دل هر آن چه میدارم
Биҷузи хаёли ҷамолат наме намояди боз
به جز خیالِ جمالت، نمینماید باز
Бидон мисли ки шаб обистанаст рӯз аз нав
بدان مَثَل که شب آبستن است روز از تو
Ситора май шимурам то ки шаб чаҳ зояд боз
ستاره میشِمُرَم تا که شب چه زاید باز
Биё ки булбули матбӯъи хотири ҳофиз
بیا که بلبلِ مطبوعِ خاطرِ حافظ
Ба буии гулбуни васл ту месарояд боз
به بویِ گُلبُنِ وصلِ تو میسُراید باز