эй ҳамаи шакли ту матбӯъу ҳамаи ҷои ту хуш
ای همه شکلِ تو مَطبوع و همه جایِ تو خوش
Дилам аз ишваи ширини шкрхои ту хуш
دلم از عشوهٔ شیرینِ شِکرخایِ تو خوش
Ҳамчуи гулбарг трӣ ҳаст вуҷӯди ту латиф
همچو گلبرگِ طَری هست وجودِ تو لطیف
Ҳамчуи сарви чамани хулди саропои ту хуш
همچو سروِ چمنِ خُلد سراپای تو خوش
Шевау нози ту ширин , хату холи ту малеҳ
شیوه و نازِ تو شیرین، خط و خالِ تو مَلیح
Чашму абрӯии ту зебо , қаду болои ту хуш
چشم و ابرویِ تو زیبا، قد و بالایِ تو خوش
Ҳам гулистони хаёлами зи ту пари нақш ва нигор
هم گلستانِ خیالم ز تو پُر نقش و نگار
Ҳам машоми дилам аз зулфи самани сои ту хуш
هم مَشامِ دلم از زلفِ سَمَن سایِ تو خوش
Дар раҳи ишқ ки аз сайл бало нест гузор
در رَهِ عشق که از سیلِ بلا نیست گذار
Кардаам хотири худро ба таманнои ту хуш
کردهام خاطرِ خود را به تمنایِ تو خوش
Шукри чашми ту чаҳ гӯям ? ки бидон беморӣ
شُکرِ چشمِ تو چه گویم؟ که بِدان بیماری
намекунад дарди маро аз рухи зебои ту хуш
میکُنَد دَردِ مرا از رخِ زیبایِ تو خوش
Дар биёбони талаб гарчи з ҳар сӯи хтрист
در بیابانِ طلب گر چه ز هر سو خطریست
намеравад ҳофиз бедил ба таваллои ту хуш
میرود حافظِ بیدل به تَوَلّایِ تو خوش