Мо озмудаем дар ин шаҳри бахти хеш
ما آزمودهایم در این شهر بختِ خویش
Берун кашид бояд аз ин вартаи рахти хеш
بیرون کشید باید از این وَرطه رَختِ خویش
Аз бас ки даст май газаму оҳ май кашам
از بس که دست میگَزَم و آه میکشم
Оташ задам чу гул ба тани лухти лухти хеш
آتش زدم چو گُل به تنِ لَخت لَختِ خویش
Дӯшами зи булбулӣ чаҳ хуш омад ки май сурӯд
دوشم ز بلبلی چه خوش آمد که میسرود
Гули гӯш паҳн карда зи шохи дарахти хеш
گل گوش پهن کرده ز شاخِ درختِ خویش
К-эии дили ту шод бош ки он ёри тундху
کای دل تو شاد باش که آن یارِ تندخو
Бисёр тунд рӯй нишинад зи бахти хеш
بسیار تند روی نشیند ز بختِ خویش
Хоҳӣ ки сахту сусти ҷаҳон бар ту бугзарад
خواهی که سخت و سست جهان بر تو بگذرد
Бигузар зи аҳди сусту суханҳои сахти хеш
بگذر ز عهدِ سست و سخنهایِ سختِ خویش
Вақтаст каз фироқи ту вази сӯзи андарун
وقت است کز فراقِ تو وز سوزِ اندرون
Оташи дроФкнм ба ҳамаи рахту пухти хеш
آتش درافکنم به همه رَخت و پَختِ خویش
эй ҳофиз ар мурод муяссар шудӣ мудом
ای حافظ ار مراد مُیَسَّر شدی مدام
Ҷамшед низ даври нмондии зи тахти хеш
جمشید نیز دور نماندی ز تخت خویش