Дар вафои ишқи ту машҳури хўбонм чу шамъ
در وفایِ عشقِ تو، مشهورِ خوبانم چو شمع
Шаб нишин кӯии сарбозону рндонм чу шамъ
شبنشینِ کویِ سربازان و رندانم چو شمع
Рӯзу шаб хобам намеояд ба чашми ғами параст
روز و شب خوابم نمیآید به چشمِ غمپرست
Бас ки дар бемории ҳиҷри ту гирёнам чу шамъ
بس که در بیماریِ هجرِ تو گریانم چو شمع
Риштаи сабрам ба миқрози ғамат бибрида шуд
رشتهٔ صبرم به مِقراضِ غمت بُبْریده شد
Ҳамчунон дар оташи меҳри ту сӯзонам чу шамъ
همچنان در آتشِ مهرِ تو سوزانم چو شمع
Гар каммияти ашк гулгунам набӯдӣ гарми рӯ
گر کُمَیتِ اشکِ گُلگونم نبودیِ گرمرو
Кӣ шудӣ равшан ба гетии рози пинҳонам чу шамъ ?
کِی شدی روشن به گیتی رازِ پنهانم چو شمع؟
Дар миёни обу оташ ҳамчунон саргарм туаст
در میانِ آب و آتش همچنان سرگرمِ توست
Ин дил зор назор ашки боронам чу шамъ
این دلِ زارِ نزارِ اشکبارانم چو شمع
Дар шаби ҳиҷрон , марои парвона васлӣ фирист
در شبِ هجران، مرا پروانهٔ وصلی فرست
Вар на аз дардати ҷаҳониро бсўзонм чу шамъ
ور نه از دَردَت جهانی را بسوزانم چو شمع
Бе ҷамоли олами орои ту рӯзам чун шаб аст
بی جمالِ عالمآرایِ تو روزم چون شب است
Бо камоли ишқи ту дар айни нуқсонам чу шамъ
با کمالِ عشقِ تو در عینِ نُقصانم چو شمع
Кӯҳи сабрам нарм шуд чун мум дар дасти ғамат
کوهِ صبرم نرم شد چون موم در دستِ غمت
То дар обу оташи ишқати гдозонм чу шамъ
تا در آب و آتشِ عشقت گدازانم چو شمع
Ҳамчуи субҳами як нафас боқӣаст бо дидори ту
همچو صبحم یک نفس باقیست با دیدارِ تو
Чеҳра бинмо длбро то ҷон барафшонам чу шамъ
چهره بنما دلبرا تا جان برافشانم چو شمع
Сарфарозам кун шабӣ аз васли худ эй нозанин
سرفرازم کن شبی از وصلِ خود ای نازنین
То мунаввар гардад аз дидорати айвонам чу шамъ
تا مُنور گردد از دیدارت ایوانم چو شمع
Оташи меҳри туро ҳофизи аҷаб дар сар гирифт
آتشِ مِهر تو را حافظ عجب در سر گرفت
Оташи дил , кӣ ба об дида бинишонам чу шамъ
آتشِ دل، کِی به آبِ دیده بنشانم چو شمع؟