Саҳар ба буии гулистон дамӣ шудам дар боғ
سَحَر به بویِ گلستان دَمی شدم در باغ
Ки то чу булбул бедил кунам алоҷи димоғ
که تا چو بلبلِ بیدل کُنَم عِلاجِ دِماغ
Ба ҷилваи гули сӯрӣ нигоҳ ме кардам
به جلوهٔ گلِ سوری نگاه میکردم
Ки буд дар шаби тира ба равшанӣ чу чароғ
که بود در شبِ تیره به روشنی چو چراغ
Чунон ба ҳасану ҷавонии хештани мағрур
چُنان به حُسن و جوانیِ خویشتن مغرور
Ки дошт аз дили булбули ҳазор гӯнаи фироқ
که داشت از دلِ بلبل هزار گونه فَراغ
Кушодаи наргиси раънои зи ҳасрати об аз чашм
گشاده نرگسِ رعنا ز حسرت آب از چشم
Ниҳодаи лолаи зи савдо ба ҷону дили сад доғ
نهاده لاله ز سودا به جان و دل صد داغ
Забон кашида чу теғӣ ба сарзаниши сӯсан
زبان کشیده چو تیغی به سرزنش سوسن
Даҳони кушодаи шақоӣқ чу мардуми аиғоғ
دهان گُشاده شقایق چو مردمِ ایغاغ
Яке чу бода прессатон суроҳеи андари даст
یکی چو باده پرستان صُراحی اندر دست
Яке чу соқии мисатон ба кафи гирифтаи аёғ
یکی چو ساقیِ مستان به کف گرفته اَیاغ
Нишоту айшу ҷавонӣ чу гули ғанимати дон
نشاط و عیش و جوانی چو گُل غنیمت دان
Ки ҳоФзо набӯд бар расӯли ғайри балоғ
که حافظا نَبُوَد بر رسول غیر بَلاغ