Ҷавзои саҳари ниҳоди ҳамоили баробарам

جوزا سَحَر نهادْ حمایل برابرم

Яъне ғуломи шоҳам ва савганд ме хӯрам

یعنی غلامِ شاهم و سوگند می‌خورم

Соқии биё ки аз мадади бахти корсоз

ساقی بیا که از مددِ بختِ کارساز

Комӣ ки хостами з худо шуд месерум

کامی که خواستم ز خدا شد مُیَسَّرَم

Ҷомӣ бидиҳ ки боз ба шодӣ рӯй шоҳ

جامی بده که باز به شادیِّ رویِ شاه

Перонаи сар , ҳавоӣ ҷавонӣаст дар серум

پیرانه سر، هوایِ جوانیست در سرم

Роҳам мазан ба васфи зулоли Хизр ки ман

راهم مزن به وصفِ زلالِ خِضِر که من

Аз ҷоми шоҳи ҷуръаи каши ҳавзи кавсарам

از جامِ شاه جُرعه کَشِ حوضِ کوثرم

Шоҳо агар ба арши расонами сарири фазл

شاها اگر به عرش رسانم سریرِ فضل

Мамлуки ин ҷанобаму мискини ин дирам

مملوکِ این جِنابم و مسکین این دَرَم

Ман ҷуръаи нӯши базм ту будам ҳазор сол

من جرعه نوشِ بزمِ تو بودم هزار سال

Кӣ тарк обхўрд кунад табъи хўгрм

کی تَرکِ آبخورْد کُنَد طبعِ خوگرم

Вар боварат намекунад аз бандаи ин ҳадис

ور باوَرَت نمی‌کند از بنده این حدیث

Аз гуфта камол , далелӣ биоварам

از گفتهٔ کمال، دلیلی بیاورم

Гар бркнми дил аз ту ва бурдорам аз ту меҳр

«گر بَرکَنَم دل از تو و بَردارم از تو مِهر

Он меҳр бар ки афканам ? он дили куҷо барам ?

آن مِهر بَر کِه افکنم؟ آن دل کجا بَرَم؟»

Мансури бен Музаффар ғозӣаст ҳрзи ман

منصور بِنْ مُظَفَّرِ غازیست حرزِ من

Ва аз ин хуҷастаи ном , бар аъдои Музаффарам

و از این خجسته نام، بر اَعدا مُظَفَّرَم

Аҳди аласти ман ҳама бо ишқи шоҳ буд

عهدِ اَلَستِ من همه با عشقِ شاه بود

Вази шоҳроҳи умр , бад-ӣн аҳд бигузарам

وَز شاهراهِ عمر، بدین عهد بگذرم

Гардун чу кард назми сурайё ба номи шоҳ

گردون چو کرد نظمِ ثُرَیّا به نامِ شاه

Ман назм дар чаро накунам ? аз ки камтарам ?

من نظمِ دُر چرا نکنم؟ از کِه کمترم؟

Шоҳини сифат чу туъма чашидам зи дасти шоҳ

شاهین صفت چو طعمه چَشیدم ز دستِ شاه

Кӣ бошад илтифот ба сайди кабӯтарам

کِی باشد التفات به صیدِ کبوترم

эй шоҳи шергир чаҳ кам гардад ар шавад

ای شاهِ شیرگیر چه کم گردد ار شود

Дар сояи ту малик фароғат месерум

در سایهٔ تو مُلکِ فَراغت مُیَسَّرَم

Шеърам ба Ямани мадҳи ту сад малики дили кушод

شعرم به یُمنِ مَدحِ تو صد مُلکِ دل گشاد

Гӯйӣ ки теғ туаст забони суханварам

گویی که تیغِ توست زبانِ سُخنورم

Бар гулшанӣ агар бигузаштам чу боди субҳ

بر گُلشنی اگر بگذشتم چو بادِ صبح

Неи ишқи сарв буд ва на шавқи санавбарам

نِی عشق سرو بود و نه شوقِ صنوبرم

Буи ту мешунидам ва бар ёд рӯй ту

بویِ تو می‌شنیدم و بر یادِ رویِ تو

Доданд соқёни тараби як ду соғарам

دادند ساقیانِ طَرَب یک دو ساغرم

Мастӣ ба оби як ду ънби вазъ банда нест

مستی به آبِ یک دو عِنَب وضعِ بنده نیست

Ман солхурдаи пери хароботи пурварам

من سالخورده پیرِ خرابات پَروَرَم

Бо сайри ахтари фалакам доварӣ басӣаст

با سِیرِ اخترِ فلکم داوری بَسیست

Инсофи шоҳи бод дар ин қиссаи ёварам

انصافِ شاه باد در این قصه یاورم

Шукри худо ки боз дар ин авҷи боргоҳ

شُکرِ خدا که باز در این اوجِ بارگاه

Товуси арш май шунӯди сяти шҳпрм

طاووسِ عرش می‌شنود صیتِ شَهپَرَم

Номами зи корхонаи ушшоқи маҳви бод

نامم ز کارخانهٔ عُشّاق محو باد

Гар ҷузи муҳаббати ту буд шуғли дигарам

گر جز محبتِ تو بُوَد شغلِ دیگرم

Шбли алосд ба сайди дилам ҳамла кард ва ман

شِبلُ الاَسَد به صیدِ دلم حمله کرد و من

Гар лоғарами вагарнаи шикори ғазанфарам

گر لاغرم وگرنه شکارِ غضنفرم

эй ошиқон рӯй ту аз зарраи бештар

ای عاشقانِ رویِ تو از ذَرِّه بیشتر

Ман кӣ расм ба васли ту каз зарраи камтарам

من کِی رَسَم به وصلِ تو کز ذَرِّه کمترم

Бинмо ба ман ки мункири ҳасани рух ту кист

بنما به من که مُنکِرِ حُسنِ رخِ تو کیست

То дидааш ба гзлки ғайрати бароварам

تا دیده‌اش به گِزلِکِ غیرت برآورم

Бар ман фитод сояи хуршеди салтанат

بر من فُتاد سایهٔ خورشیدِ سلطنت

Ва акнӯн фароғатаст зи хуршеди ховарам

و اکنون فَراغت است ز خورشیدِ خاورم

Мақсӯд аз ин муомила бозортизӣ аст

مقصود از این معامله بازارتیزی است

Неи ҷилва май фурушаму неи ишва май хуррам

نی جلوه می‌فروشم و نی عشوه می‌خرم

Хониш
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ғзл шморҳ 329 — сҳӣл қосмӣ
ғзл шморҳ 329 — мҳмдрзо мвмн нжод
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