Ту ҳамчуи субҳӣ ва ман шамъи хилвати саҳарам
تو همچو صبحی و من شمعِ خلوتِ سَحَرم
Табассумӣ куну ҷони байн ки чун ҳамеи сипарам
تبسمی کن و جان بین که چون همیسِپرَم
Чунин ки дар дили ман доғи зулф саркаш туаст
چُنین که در دلِ من داغِ زلفِ سرکَشِ توست
Бунафша зор шавад турбатам чу даргузарам
بنفشه زار شود تُربَتَم چو درگذرم
Бар остони муродат кушодаам дар чашм
بر آستانِ مرادَت گشادهام درِ چشم
Ки як назар фиканӣ , худ фикандӣ аз назарам
که یک نظر فِکنی، خود فِکندی از نظرم
Чаҳ шукр гӯямат эй хайли ғам , ъФоки аллоҳ
چه شُکر گویمت ای خیلِ غم، عَفاکَ الله
Ки рӯз бе касе охир наме рӯй зи серум
که روزِ بیکسی آخر نمیروی ز سرم
Ғуломи мардуми чашмам , ки бо сиёҳи дилӣ
غلامِ مردمِ چشمم، که با سیاه دلی
Ҳазор қатраи баборад чу дарди дили шимурам
هزار قطره بِبارَد چو دردِ دل شِمُرَم
Ба ҳар назари бути мо ҷилва мекунад , лекин
به هر نظر بُت ما جلوه میکند، لیکن
Каси ин киришма набинад ки ман ҳаме нагарм
کس این کرشمه نبیند که من همی نِگَرَم
Ба хоки ҳофиз агар ёр бугзарад чун бод
به خاکِ حافظ اگر یار بگذرد چون باد
зи шавқ дар дили он тангнои кафани бадарам
ز شوق در دلِ آن تنگنا کفن بِدَرَم