Намози шоми ғарибон чу гиряи оғозам
نمازِ شامِ غریبان چو گریه آغازم
Ба мӯяҳои ғарибонаи қиссаи пардозам
به مویههایِ غریبانه، قِصه پردازم
Ба ёди ёру диёри он чунон бгрими зор
به یادِ یار و دیار آنچنان بِگِریَم زار
Ки аз ҷаҳони раҳу расми сафари барандозам
که از جهان رَه و رسمِ سفر براندازم
Ман аз диёри ҳабибам на аз билоди ғариб
من از دیارِ حبیبم نه از بِلاد غریب
Мҳимно ба рафиқони худ расони бозам
مُهَیمنا به رفیقانِ خود رسان بازم
Худоиро мададӣ эй рафиқи раҳ то ман
خدای را مددی ای رفیقِ رَه تا من
Ба кӯии майкадаи дигари илми броФрозм
به کویِ میکده دیگر عَلَم برافرازم
Хиради зи перии ман кӣ ҳисоб баргирад ?
خِرَد ز پیریِ من کِی حساب برگیرد؟
Ки боз бо санамии Тифл , ишқ май бозам
که باز با صَنَمی طفل، عشق میبازم
Биҷузи сабоу шимолам наме шиносади кас
بجز صَبا و شِمالم نمیشناسد کس
Азизи ман , ки ба ҷуз бод нест дмсозм
عزیز من! که بجز باد نیست دَمسازم
Ҳавои манзили ёр , оби зиндагонии мост
هوایِ منزل یار، آب زندگانیِ ماست
Сабо биор насимии зи хоки Широзам
صبا بیار نسیمی ز خاکِ شیرازم
Сиришкам омад ва айбам бигуфт рӯй ба рӯй
سِرشکم آمد و عیبم بگفت روی به روی
Шикоят аз ки кунам ? хонагӣаст ғаммозам
شکایت از که کنم؟ خانگیست غَمّازَم
зи чанг Зуҳра шунидам ки субҳдам ме гуфт
ز چَنگِ زهره شنیدم که صبحدم میگفت
Ғуломи ҳофизи хуши лаҳҷаи хуши овозам
«غلامِ حافظِ خوشلهجهٔ خوشآوازم»