Ман ки аз оташи дил чун хам май дар ҷӯшам

من که از آتشِ دل چون خُمِ مِی در جوشم

Меҳр бар лаб зада , хӯн мехӯраму хомӯшам

مُهر بر لب زده، خون می‌خورم و خاموشم

Қасд ҷонаст тамаъ дар лаби ҷонон кардан

قصدِ جان است طمع در لبِ جانان کردن

Ту марои байн ки дар ин кор ба ҷон ме кӯшам

تو مرا بین که در این کار به جان می‌کوشم

Ман кӣ озод шавам аз ғами дил ? чун ҳар дам

من کِی آزاد شَوَم از غمِ دل؟ چون هر دَم

Ҳиндӯии зулфи бутӣ ҳалқа кунад дар гӯшам

هندویِ زلفِ بُتی حلقه کُنَد در گوشم

Ҳоши ллаҳ ки ним муътақиди тоъати хеш

حاشَ لِلَّه که نیَم معتقدِ طاعتِ خویش

Ин қадар ҳаст ки гуҳи гуҳи қадаҳӣ май нӯшам

این قَدَر هست که گَه گَه قدحی می‌نوشم

Ҳаст умедам ки алорақми адуи рӯзи ҷазо

هست امیدم که علیرغمِ عدو روزِ جزا

Файз афваш наниҳад бори гунаҳ бар дӯшам

فیضِ عَفوَش نَنَهد بارِ گُنَه بر دوشم

Падарами равзаи ризвон ба ду гандуми бФрўхт

پدرم روضهٔ رضوان به دو گندم بفروخت

Ман чаро малики ҷаҳонро ба ҷӯй нафурӯшам ? !

من چرا مُلکِ جهان را به جوی نفروشم؟!

Хирқаи пӯшии ман аз ғояти дайн дорӣ нест

خرقه‌پوشیِ من از غایتِ دین‌داری نیست

Пардае бар сари сад айби ниҳон май пӯшам

پرده‌ای بر سرِ صد عیبِ نهان می‌پوشم

Ман ки хоҳам ки нанӯшам ба ҷуз аз роўқи хам

من که خواهم که ننوشم به جز از راوَقِ خُم

Чаҳ кунамгар сухани пери Муғони нниўшм ?

چه کنم گر سخنِ پیرِ مُغان نَنْیوشَم؟

Гар аз ин даст занад мутриби маҷлиси раҳи ишқ

گر از این دست زَنَد مُطربِ مجلس رَهِ عشق

Шеъри ҳофизи бабради вақти самоъ аз ҳушам

شعرِ حافظ بِبَرَد وقتِ سماع از هوشم

Хониш
ғзл шморҳ 340 — фрӣдвн фрҳ ондвз
ғзл шморҳ 340 — сҳӣл қосмӣ
ғзл шморҳ 340 — мҳмдрзо мвмн нжод
ғзл шморҳ 340 — мҳсн лӣлҳ квҳӣ
ғзл шморҳ 340 — фотмҳ зндӣ
ғзл шморҳ 340 — ъндлӣб
ғзл шморҳ 340 — оҳсон ҳлоҷ
ғзл шморҳ 340 — офср орӣо
ғзл шморҳ 340 — шопрк шӣрозӣ
ғзл шморҳ 340 — мҳмдрзококоъӣ
ғзл шморҳ 340 — нознӣн бозӣон