Фатвои пер Муғон дораму қўлисти қадим
فتوی پیرِ مُغان دارم و قولیست قدیم
Ки ҳаромаст май онҷо ки на ёраст надим
که حرام است مِی آن جا که نه یار است ندیم
Чок хоҳам задан ин далқи риёе , чаҳ кунам ?
چاک خواهم زدن این دلقِ ریایی، چه کنم؟
Рӯҳро суҳбати ноҷинс ъзобист ?илем
روح را صحبتِ ناجنس، عذابیست اَلیم
То магар ҷуръа фишонд лаби ҷонон бар ман
تا مگر جرعه فشانَد لبِ جانان بر من
Сол ҳо шуд ки манам бар дар майхонаи муқӣм
سالها شد که منم بر درِ میخانه مقیم
Магараши хизмати дерини ман аз ёд бирафт
مگرش خدمتِ دیرین من از یاد برفت
эй насими саҳарии ёди диҳиши аҳди қадим
ای نسیم سحری! یاد دَهَش عهدِ قدیم
Баъди сад сол агар бар сари хоками гузарӣ
بعد صد سال اگر بر سرِ خاکم گذری
Сари براردи зи гулами рақси кунон азм Ромем
سر برآرد ز گِلم رقصکنان عَظمِ رَمیم
Дилбар аз мо ба сад умеди ситади аввали дил
دلبر از ما به صد امّید سِتد اول دل
Зоҳиран аҳд Фромш накунад халқи Карим
ظاهراً عهد فرامُش نکُند خُلقِ کریم
Ғунчаи гӯи тнгдл аз кор фурӯбаста мабош
غنچه گو «تنگدل از کارِ فروبسته مَباش
Каз дами субҳи мадади ёбӣу анфоси насим
کز دم صبح مدد یابی و انفاسِ نسیم»
Фикри беҳбуди худ эй дили зи дарӣ дигар кун
فکر بهبود خود ای دل ز دری دیگر کن
Дард ошиқ нашавад ба , ба мудовои ҳаким
درد عاشق نشود به، به مداوایِ حکیم
Гавҳар маърифат омӯз ки бо худ бабрӣ
گوهرِ معرفت آموز که با خود بِبَری
Ки насиб дгаронаст нассоби зару сим
که نصیبِ دگران است نِصابِ زر و سیم
Дом сахтаст магар ёр шавад лутфи худо
دام سخت است مگر یار شود لطفِ خدا
Вар на одами набарди сарфаи зи шайтони раҷим
ور نه آدم نَبَرد صرفه ز شیطانِ رجیم
Ҳофиз ар сим ва зарат нест чаҳ шуд ? шокир бош
حافظ ار سیم و زرت نیست، چه شد؟ شاکر باش
Чаҳ ба аз давлати лутфи сухану табъи салим
چه به از دولتِ لطفِ سخن و طَبع سلیم