Бе меҳри рахти рӯзи маро нур намондаст
بی مِهرِ رُخَت روزِ مرا نور نماندست
Вази умр , марои ҷузи шаб диҷўр намондаст
وز عمر، مرا جز شبِ دیجور نماندست
Ҳангоми видоъи ту зи баси гиря ки кардам
هنگامِ وداعِ تو ز بس گریه که کردم
Давр аз рухи ту , чашми маро нур намондаст
دور از رخِ تو، چشمِ مرا نور نماندست
намерафт хаёли ту зи чашми ман ва ме гуфт
میرفت خیالِ تو ز چشمِ من و میگفت
Ҳайҳот аз ин гӯша ки маъмур намондаст
هیهات از این گوشه که معمور نماندست
Васли ту аҷалро зи серуми давр ҳаме дошт
وصلِ تو اَجَل را ز سرم دور همیداشت
Аз давлати ҳиҷри ту кунун давр намондаст
از دولتِ هجرِ تو کنون دور نماندست
Наздик шуд он дам ки рақиб ту бигӯед
نزدیک شد آن دم که رقیب تو بگوید
Давр аз рахти ин хаста ранҷур намондаст
دور از رُخَت این خستهٔ رنجور نماندست
Сабраст марои чораи ҳиҷрони ту лекин
صبر است مرا چارهٔ هجرانِ تو لیکن
Чун сабр тавон кард ки мақдӯр намондаст ?
چون صبر توان کرد که مقدور نماندست؟
Дар ҳиҷри тугар чашми марои об равон аст
در هِجرِ تو گر چشمِ مرا آبِ روان است
Гӯи хӯни ҷигари рез ки маъзӯр намондаст
گو خونِ جگر ریز که معذور نماندست
Ҳофиз , зи ғам аз гиря напардохт ба ханда
حافظ، ز غم از گریه نپرداخت به خنده
Мотам задаро доъия сур намондаст
ماتم زده را داعیهٔ سور نماندست