Болоблнди ишвагар нақши бози ман
بالابلندِ عِشْوِهگرِ نقشبازِ من
Кӯтоҳ кард қиссаи зуҳди дарози ман
کوتاه کرد قصّهٔ زُهْدِ درازِ من
Дидӣ дило ки охири перӣу зуҳду илм
دیدی دلا که آخرِ پیری و زُهْد و عِلْم
Бо ман чаҳ кард дидаи маъшуқаи бози ман
با من چه کَرْد دیدهٔ معشوقهبازِ من؟
Май тарсам аз харобии имон ки май барад
میترسم از خرابیِ ایمان که میبَرَد
Миҳроби абрӯии ту ҳузури намози ман
مِحْرابِ ابرویِ تو، حُضورِ نمازِ من
Гуфтам ба далқ зарқ бапушам нишони ишқ
گفتم به دَلْقِ زَرْق بپوشم نشانِ عشق
Ғаммоз буд ашк ва аён кард рози ман
غَمّاز بود اَشْک و عَیان کرد رازِ من
Мастаст ёру ёд ҳарифон наме кунад
مست است یار و یادِ حریفان نمیکُنَد
Зикраш ба хайри соқии мискини навози ман
ذکرش به خیر، ساقیِ مِسْکیننوازِ من
ё раб кӣ он сабои бўзд каз насими он
یا رب کی آن صبا بِوَزَد کز نسیمِ آن
Гардад шмомаҳи карамаши корсози ман
گَرْدَد شمامهٔ کَرَمَش، کارسازِ من؟
Нақшӣ бар об май занам аз гиря ҳолиё
نقشی بر آب میزنم از گریه، حالیا
То кӣ шавад қарини ҳақиқати муҷози ман
تا کی شود قرینِ حقیقت، مجازِ من
Бар худ чу шамъи хандаи занон гиря ме кунам
بر خود، چو شمع، خندهزنان، گریه میکنم
То бо ту санги дил чаҳ кунад сӯзу сози ман
تا با تو سنگدل چه کُنَد سوز و سازِ من؟
Зоҳид чу аз намози ту корӣ наме равад
زاهد؛ چو از نمازِ تو کاری نمیرود
Ҳам мастии шабонау розу ниёзи ман
هم مستیِ شبانه و راز و نیازِ من
Ҳофизи зи гиря сӯхт бигӯ ҳолаш эй сабо
«حافظ»، زِ گریه سوخت بگو حالش ای صبا
Бо шоҳи дӯстпарвар душмани гудози ман
با شاهِ دوستپرورِ دشمنگُدازِ من