Гулбуни айш май дамади соқии глъзори кӯ
گلبن عیش میدمد ساقی گلعذار کو؟
Боди баҳор май вазади бодаи хушгувори кӯ
باد بهار میوزد بادهٔ خوشگوار کو؟
Ҳар гули нави зи глрхии ёд ҳаме кунад вале
هر گل نو ز گلرخی یاد همی کند ولی
Гӯши сухани шинави куҷои дидаи эътибори кӯ
گوش سخنشنو کجا؟ دیدهٔ اعتبار کو؟
Маҷлиси базми айшро ғолия мурод нест
مجلس بزم عیش را غالیهٔ مراد نیست
эй дами субҳи хуши нафаси нофаи зулфи ёри кӯ
ای دمِ صبحِ خوشنفس نافهٔ زلف یار کو؟
Ҳасани фурӯшӣ гулам нест таҳаммул эй сабо
حُسنفروشیِ گلم نیست تحمل ای صبا
Даст задам ба хӯни дили баҳри худонигор кӯ
دست زدم به خون دل بهر خدا نگار کو؟
Шамъи саҳаргаҳӣ агар лофи зи ориз ту зад
شمع سحرگهی اگر لاف ز عارض تو زد
Хасми забон дароз шуд ханҷари обдори кӯ
خصم زبان دراز شد خنجر آبدار کو؟
Гуфт магари зи лаъли ман бӯсаи надории орзӯ
گفت «مگر ز لعل من بوسه نداری آرزو؟»
Мардум аз ин ҳавас вале қудрату ихтиёри кӯ
مُردم از این هوس ولی قدرت و اختیار کو؟
Ҳофиз агар чаҳ дар сухани хозини ганҷ ҳикмат аст
حافظ اگر چه در سخن خازن گنج حکمت است
Аз ғами рӯзгори дун , табъи сухани гузори кӯ
از غم روزگارِ دون، طبعِ سخنگزار کو؟