Ба чашм кардаам абрӯии моҳи симое
به چشم کردهام ابرویِ ماهسیمایی
Хаёли сбзхтии нақш бастаам ҷое
خیالِ سبزخطی، نقش بستهام جایی
Умед ҳаст ки маншури ъшқбозии ман
امید هست که منشورِ عشقبازیِ من
Аз он камонча абрӯ расад ба тғроиӣ
از آن کمانچهٔ ابرو رسد به طُغرایی
Серуми з даст бишуд чашм аз интизор бсухт
سَرم زِ دست بشد، چشم از انتظار بسوخت
Дар орзӯии сару чашми маҷлиси ороӣ
در آرزویِ سر و چشمِ مجلسآرایی
Мукаддараст дили оташ ба хирқа хоҳам зад
مُکدّر است دِل، آتش به خرقه خواهم زد
Биё бибин ки кро мекунад тамошое
بیا! ببین! که کِرا میکُند تماشایی
Ба рӯзи воқеаи тобути мо з сарв кунед
به روزِ واقعه، تابوتِ ما زِ سرو کنید
Ки мерӯем ба доғи баландболое
که میرَویم به داغِ بلندبالایی
Зимоми дил ба касе додаам ман дарвеш
زمامِ دِل به کسی دادِهام منِ دَرویش
Ки несташ ба кас аз тоҷу тахти парвое
که نیستش به کس از تاج و تخت، پروایی
Дар он мақом ки хубони зи ғамза теғ зананд
در آن مَقام که خوبان ز غَمزه، تیغ زنند
Аҷаби мадори сиррии аўФтодаҳ дар пое
عجب مدار سَری اوفتاده در پایی
Маро ки аз рух ӯ моҳ дар шабистон аст
مرا که از رخِ او، ماه در شبستان است
Куҷо буд ба фурӯғи ситораи парвое
کجا بود به فروغِ ستاره، پروایی؟
Фироқу васл чаҳ бошад ризои дӯсти талаб
فراق و وصل چه باشد؟ رضایِ دوست طلب
Ки ҳайф бошад аз ӯ ғайр ӯ таманное
که حیف باشد از او، غیرِ او، تمنایی
Дрри з шавқ бароранд моҳён ба нисор
دُرَر ز شوق برآرند ماهیان به نثار
Агар сафина ҳофиз расад ба дарёӣ
اگر سفینهٔ حافظ رسد به دریایی